पर्यटन को नई पहचान देगा उन्नत संग्रहालय : उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, संस्कृति का पुनर्जागरण, संग्रहालय में मिलेगी प्राचीन सिंधु सभ्यता की झलक : देवनानी

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राजकीय संग्रहालय में सिंधु सभ्यता की मिलेगी अनोखी झलक, धरोहर संरक्षण के साथ आधुनिक प्रदर्शनी का होगा संगम

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत राजकीय संग्रहालय, अजमेर के संरक्षण, जीर्णाेद्धार एवं उन्नयन कार्यों का बुधवार को उप मुख्यमंत्री ​दिया कुमारी तथा विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने शुभारंभ  किया ।

उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि संग्रहालय किसी भी समाज की धरोहर होता है। ये प्राचीन सभ्यता, जीवनशैली, कला, युद्ध कौशल और चिंतन को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय का रख-रखाव सरकार की जिम्मेदारी है। इसके साथ नागरिकों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने परिवार और बच्चों के साथ इन धरोहर स्थलों पर जाएं और उन्हें जीवंत बनाए रखें। उन्होंने कहा कि बजट घोषणा के अंतर्गत 5 करोड़ रुपये की राशि संग्रहालय विकास कार्यों के लिए स्वीकृत की गई थी, जो अब धरातल पर उतर रही है। उन्होंने कहा कि हेरिटेज लाइब्रेरी के नवीनीकरण और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए भी बजट प्रावधान किया जाएगा। स्थानीय कामगारों की हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए संग्रहालय में एक सवेनिअर शॉप स्थापित की जाए। इससे वोकल फॉर लोकल की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि आगामी समय में घूमर उत्सव का आयोजन किया जाएगा। ऎतिहासिक धरोहरों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाना चाहिए। इससे धरोहरों की जीवंतता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पर्यटक स्थलों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करने वाले साइन बोर्ड लगाए जाने आवश्यक है। इससे पर्यटक बढ़ेंगे। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया सहित अन्य प्लेटफॉर्म पर अपने स्थानीय पर्यटक स्थलों को बढ़ावा दें।

विधानसभा अध्यक्ष  ने कहा कि राजकीय संग्रहालय का उन्नयन अजमेर की ऐतिहासिक पहचान को नई दिशा देगा। संग्रहालय में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियां और हजारों वर्षों की मानव सभ्यता से जुड़ी मूर्तियां हमारी संस्कृति के धरोहर हैं। सिंधु दर्शन दीर्घा पर्यटकों को विश्व की प्राचीनतम सभ्यता का सजीव अनुभव कराएगी। उन्होंने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण की संज्ञा देते हुए कहा कि नई पीढ़ी यहां आकर अपने पूर्वजों के त्याग और बलिदान से परिचित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि संग्रहालय में पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर इन्हें स्थाई रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अजमेर पर्यटन की दृष्टि से राज्य का हृदय है, जहां धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के साथ-साथ पर्यावरणीय पर्यटन की भी असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने लेपर्ड सफारी, वरुण सागर का सौंदर्यकरण, साइंस पार्क और अन्य परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पुष्कर एवं दरगाह आने वाले पर्यटकों को नए विकल्प प्रदान करेंगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और शहर विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।

इस अवसर पर संभागीय आयुक्त श्री शक्ति सिंह राठौड़, पुरातत्व विभाग के निदेशक श्री पंकज धरेन्द्र, उपनिदेशक श्रीमती कुष्णकान्ता शर्मा, वृत अधीक्षक श्री नीरज कुमार त्रिपाठी, केन्द्रीय संग्रहालय जयपुर के अधीक्षक श्री महेन्द्र कुमार निम्हल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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