2 से 15 अक्टूबर तक पैक्स स्तर पर आयोजित किये जाएंगे शिविर, अभियान की पूर्व तैयारी अवधि में हासिल हुई उल्लेखनीय उपलब्धियां
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। सहकारिता हमारी सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है। राज्य में सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। इसी क्रम में 2 से 15 अक्टूबर तक प्रदेश भर में ‘सहकार सदस्यता अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रमुख रूप से पांच प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। यह अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने तथा नई सहकारिता नीति के अनुरूप सहकारिता का दायरा बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
8 हजार 200 से अधिक पैक्स स्तर पर लगेंगे शिविर-
सहकार सदस्यता अभियान अभियान के अंतर्गत राज्य की 8,200 से अधिक पैक्स के स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महिलाओं तथा युवाओं को सहकारी समितियों से जोड़ने पर विशेष रूप से फोकस किया जाएगा। साथ ही, नई पैक्स के गठन के लिए प्रस्ताव और सदस्यता राशि प्राप्त कर स्वीकृति जारी करना, भूमिविहीन पैक्स में गोदाम निर्माण के लिए भूमि आवंटन की कार्यवाही जैसे कार्य भी अभियान के तहत होंगे। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित नवीन सहकारी कानून के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी जनसाधारण को देना तथा पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत लम्बित आवेदनों की ई-केवाईसी एवं आधार सीडिंग के कार्य भी अभियान के अंतर्गत किए जाएंगे।
जिलों के प्रभारी अधिकारी करेंगे अभियान की मॉनिटरिंग-
अभियान अवधि के दौरान प्रतिदिन बिना किसी अवकाश के शिविरों का आयोजन किया जाएगा। एक दिवस में न्यूनतम 155 एवं अधिकतम 769 पैक्स में शिविरों का आयोजन किया जाएगा। अभियान के दौरान अजमेर जोन में 1443, भरतपुर जोन में 826, जोधपुर जोन में 1436, उदयपुर जोन में 1399, कोटा जोन में 815, बीकानेर जोन में 1099 तथा जयपुर जोन में 1276 पैक्स में शिविर लगेंगे। जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक पैक्स का गठन नहीं हुआ है, उनमें राज्य सरकार द्वारा आयोजित किये जा रहे ‘ग्रामीण सेवा शिविरों’ के अंतर्गत अभियान से संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के लिए सहकारिता विभाग द्वारा राज्य स्तर से सभी जिलों के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किये गए हैं, जो नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
अभियान से पूर्व तैयारी अवधि में हासिल हुई कई उपलब्धियां-
अभियान को सफल बनाने के लिए 9 से 29 सितम्बर तक पूर्व तैयारी अवधि निर्धारित की गई थी, जिसमें कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। विभागीय प्रयासों के साथ ही स्काउट-गाइड, एनजीओ, महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग और युवा भारत मंडल आदि के सहयोग से डेढ़ लाख से अधिक सदस्य पूर्व तैयारी अवधि में ही बनाये जा चुके हैं। अभियान के अंतर्गत पैक्सविहीन सभी ग्राम पंचायतों में नवीन पैक्स के गठन का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में राज्य में ऐसी लगभग 2,158 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें पैक्स के गठन की कार्यवाही की जानी है। अभियान की पूर्व तैयारी अवधि में इनमें से 1,250 से अधिक ग्राम पंचायतों में पैक्स के सर्वे की कार्यवाही पूरी कर ली गई है। राज्य में ऐसी 1,988 पैक्स और 40 केवीएसएस हैं, जो या तो भूमिविहीन हैं या फिर जिनके पास गोदाम के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है। अभियान की पूर्व तैयारी अवधि में 967 पैक्स तथा 20 केवीएसएस में गोदाम निर्माण के लिए भूमि का चिह्नीकरण किया गया है। अभियान की पूर्व तैयारी अवधि के दौरान लगभग 1.50 लाख व्यक्तियों को प्रस्तावित नवीन सहकारी कानून के प्रावधानों की जानकारी दी गई, इस दौरान पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 13 हजार 735 किसानों की आधार सीडिंग की जा चुकी है और 6 हजार 334 किसानों की ई-केवाईसी का कार्य पूर्ण किया गया है।
राज्य में सहकारिता नेटवर्क बनेगा और अधिक व्यापक-
अभियान के अंतर्गत सहकारी समितियों से नये सदस्य जुड़ने से राज्य का सहकारी आन्दोलन और अधिक सशक्त होगा। सभी ग्राम पंचायतों में पैक्स का गठन हो जाने से राज्य में सहकारिता का नेटवर्क और अधिक व्यापक हो जाएगा। भूमिविहीन पैक्स को भूमि का आवंटन हो जाने से नये गोदामों का निर्माण संभव हो पाएगा, जिससे अन्न की बर्बादी रूकेगी, किसानों को कम दामों पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी और गोदामों के किराये से पैक्स की आय में वृद्धि होगी। नवीन सहकारिता कानून सहकारी समितियों के कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने में कारगर साबित होगा। लम्बित आवेदनों की ई-केवाईसी और आधार सीडिंग का कार्य होने से पीएम किसान सम्मान निधि योजना से वंचित पात्र कृषकों को योजना का लाभ मिल पाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को क्रियान्वित करने में राजस्थान देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। ‘सहकार सदस्यता अभियान’ इस दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगा। राज्य के गांव, कृषि, किसान और सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इससे उनका सामाजिक और आर्थिक विकास होगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।