
सरकारी अस्पतालों में इलेक्ट्रिकल और फायर ऑडिट की समीक्षा की
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में प्रदेश में वर्षा ऋतु के दौरान संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण एवं उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए विभागीय अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टाइफस, वायरल बुखार तथा जलजनित रोगों की स्थिति और उनसे निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
चिकित्सा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को समय पर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कमी नहीं रहे। उन्होंने अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयों, जांच किटों, बेड, ऑक्सीजन, आवश्यक उपकरणों तथा चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
खींवसर ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा रोगियों की शीघ्र पहचान एवं उपचार के लिए विशेष टीमों को सक्रिय रखा जाए। उन्होंने जिला स्तर पर कंट्रोल रूम को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जयपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर एवं सवाई माधोपुर जिलों में डेंगू, प्रतापगढ़, सलूम्बर, बाड़मेर, उदयपुर एवं बांसवाड़ा जिलों में मलेरिया तथा कोटा, बूंदी, बारां, जयपुर व झालावाड़ जिलों में स्क्रब टाइफस मौसमी बीमारियों की विशेष निगरानी एवं व्यवस्थाओं पर आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में साफ-सफाई, फॉगिंग, एंटी-लार्वा गतिविधियों एवं पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि स्थानीय निकायों एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि लोग अपने आसपास पानी जमा न होने दें और स्वच्छता बनाए रखें।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि आमजन भी अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें, पानी जमा न होने दें तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें। राज्य सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए इलेक्ट्रिकल एवं फ़ायर ऑडिट के बारे में संभागवार जानकारी ली ।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों, उनके परिजनों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी चिकित्सा संस्थानों में विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित की जाए। इलेक्ट्रिकल ऑडिट के माध्यम से विद्युत उपकरणों, वायरिंग, पैनल बोर्ड एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों की नियमित जांच कर संभावित जोखिमों की पहचान कर उनका समयबद्ध निराकरण किया जाए।
चिकित्सा मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में फ़ायर ऑडिट नियमित रूप से कराया जाए तथा अग्निशमन यंत्रों, फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, हाइड्रेंट सिस्टम एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए। अस्पतालों में समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाए।
खींवसर ने कहा कि ऑडिट के दौरान सामने आने वाली कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने सभी चिकित्सा संस्थानों से अनुपालना रिपोर्ट प्राप्त कर नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। बैठक में आयुक्त चिकित्सा शिक्षा बाबूलाल गोयल, अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम एवं निदेशक आईईसी डॉ. टी.शुभमंगला, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर एवं वीसी के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य एवं अधीक्षक, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, संभाग स्तर पर संयुक्त निदेशक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।