मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता हो रही सशक्त – नवीन को-ऑपरेटिव कोड से कामकाज में आएगी गति, पारदर्शिता होगी सुनिश्चित

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सहकारी सोसायटियों में अनियमितताओं पर नियंत्रण होगा स्थापित

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार सहकारी सोसायटियों में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनियमितताओं पर नियंत्रण एवं समितियों की व्यवसाय वृद्धि के लिए कृतसंकल्पित है। इसी क्रम में राज्य सरकार सोसायटियों तथा आमजन के हित में सहकारी कानून को अधिक प्रासंगिक बनाते हुए नवीन सहकारी अधिनियम लाने जा रही है। प्रस्तावित नवीन सहकारी अधिनियम में ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे आमजन का सहकारी समितियों पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नवीन सहकारी अधिनियम वर्तमान में लागू राजस्थान सहकारिता अधिनियम, 2001 का स्थान लेगा। इसे वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुरूप अधिक प्रासंगिक बनाया गया है। राज्य सरकार ने इस संबंध में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसने महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल आदि सहकारी आन्दोलन के अग्रणी राज्यों के सहकारी कानूनों का व्यावहारिक अध्ययन कर तथा वरिष्ठ अधिकारियों व विशेषज्ञों से चर्चा कर नवीन को-ऑपरेटिव कोड का ड्राफ्ट तैयार किया था। इसमें प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनियमितताओं पर नियंत्रण और त्वरित निस्तारण के साथ ही समितियों की व्यवसायिकता, आपसी सहयोग को सुगम बनाने, समितियों के प्रबंधन में एकाधिपत्य हटाने, लोकतांत्रिक एवं सदस्योन्मुखी प्रबंधन आदि पर विशेष रूप से फोकस किया गया है।

नवीन प्रावधानों के बारे में आमजन को किया जा रहा जागरूक

प्रदेश में 2 से 15 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे ‘सहकार सदस्यता अभियान’ के अंतर्गत जनसाधारण को प्रस्तावित नवीन अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्रदान कर उन्हें इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक लोगों को प्रस्तावित अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी प्रदान की जा चुकी है। नवीन अधिनियम में सहकारी समितियों को स्वयं के तथा सदस्यों के उत्पाद अपने कार्यक्षेत्र से बाहर भी विक्रय किए जाने की छूट दिये जाने तथा सोसायटियों में बाजार से प्रतिस्पर्धा एवं व्यवसाय में वृद्धि के लिए आपसी सहमत शर्तों पर साझेदारी करने के प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इसी प्रकार, सहकारिता क्षेत्र के विस्तार और नई सोसायटियों के गठन को गति दिए जाने के लिए सोसायटियों में राज्य सरकार अथवा भारत सरकार द्वारा शेयर पूंजी धारण किए जाने की अधिकतम सीमा समाप्त करने का प्रावधान तथा लोकहित में नई सोसायटियों के गठन के लिए सदस्यों में तदर्थ समिति गठित किए जाने में अवरोध होने पर रजिस्ट्रार द्वारा 3 माह के लिए तदर्थ समिति गठित किए जाने और उसके बाद उपनियम के अनुसार चुनाव करवाये जाने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। 

सहकारी समितियों की आम सभा का समयबद्ध आयोजन होगा सुनिश्चित

नवीन अधिनियम में सहकारी समितियों की आमसभा के आयोजन को सुगम बनाने के लिए सदस्यों को व्हाट्सएप एवं ई-मेल से भी सूचित किए जाने तथा आमसभा आयोजित न करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर 5 हजार रुपये के अर्थदण्ड का प्रावधान प्रस्तावित है। यदि संचालक मंडल सदस्य बिना अनुमति के संचालक मंडल की तीन बैठकों में लगातार अनुपस्थित रहता है तो उसे निर्याेग्य किए जाने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। जिन सोसायटियों को राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त नहीं है, उन्हें रजिस्ट्रार द्वारा जारी सामान्य शर्तों और अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए वित्तीय व आन्तरिक प्रशासनिक मामलों में स्वायत्तता का प्रावधान भी नवीन अधिनियम में किया गया है। 

वेब पोर्टल के माध्यम से मिलेगी सोसायटी की वित्तीय स्थिति की जानकारी

सोसायटियों में समयबद्ध रूप से ऑडिट हो इसके लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान नवीन अधिनियम में किये गए हैं। इसमें सोसायटी के स्तर से ऑडिटर नियुक्ति का प्रस्ताव उसी वित्तीय वर्ष में विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, अन्यथा रजिस्ट्रार द्वारा ऑडिटर की नियुक्ति की जा सकेगी। सोसायटी की वित्तीय स्थिति के संबंध में आमजन को जानकारी हो, इसके लिए सोसायटी द्वारा ऑडिट की रिपोर्ट जारी होने के बाद 15 दिवस के अंदर विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना आवश्यक होगा। गबन एवं अनियमितताओं के मामलों में त्वरित कार्यवाही कर अधिभार निर्धारण किए जाने तथा वसूली किए जाने के लिए ऑडिट, जांच, निरीक्षण या समापक की रिपोर्ट के आधार पर आरोप तय कर विचारण का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की अध्यपेक्षा पर भी जांच करवाने का प्रावधान नवीन अधिनियम में प्रस्तावित किया गया है।

क्रेडिट सोसायटियों में जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सदस्य बनाकर ही जमा किए जाने तथा उनके कार्यकलापों के विनियमन के लिए विनियामक बोर्ड के गठन का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों को प्रवंचना से बचाने के लिए सरकार द्वारा नियम बनाये जा सकेंगे। नवीन अधिनियम में ‘सहकारी’ शब्द के दुरूपयोग पर 50 हजार रुपये के अर्थदण्ड का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। साथ ही, नोटिस एवं आदेश की व्हाट्सएप एवं ई-मेल आदि के माध्यम से तामीली तथा सोसायटी अथवा सदस्यों के हित में रजिस्ट्रार को निर्देश देने की शक्तियों का प्रावधान भी नवीन अधिनियम में किया गया है।

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