सुमंगल–दीपावली मेला राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति और शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट संगम

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) द्वारा आयोजित सुमंगल–दीपावली मेला चतुर्थ दिन भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र रहा। मेले में राजीविका के स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं द्वारा निर्मित पारंपरिक परिधान एवं वस्त्र, जिनमें राजस्थान की समृद्ध कला, संस्कृति और शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट संगम देखने को मिला।

प्रदर्शित परिधानों में कॉटन से बने राजपूती सेट, एप्लिक (कटवर्क) सूट, राजपूती पोशाकें, कशिदाकारी दुपट्टे, बांधणी के सूट, साड़ियाँ और दुपट्टे, एवं अज्रक प्रिंट के सूट एवं दुपट्टे विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त, ऊन से बने शॉल, जैकेट और स्टोल, पारंपरिक पट्‌टू और बर्दी शॉल, कॉटन से बने लॉन्ग स्कर्ट, बच्चों के परिधान एवं सूट, बगरू प्रिंट एवं संगानेरी प्रिंट सूट सेट भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इन परिधानों ने न केवल राजस्थान की पारंपरिक शिल्पकला को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता की सशक्त झलक भी दिखाई। सुमंगल दीपावली मेला 2025 ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विपणन के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करता है। यह पहल स्थानीय शिल्प को प्रोत्साहन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा पारंपरिक परिधानों को नए बाज़ारों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उल्लेखनीय है कि सुमंगल–दीपावली मेला 2025” का आयोजन 1 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (आईजीपीआरएस), जयपुर में किया जा रहा है।

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