
गेहूं-जौ अनुसंधान को जलवायु अनुकूल बनाने, उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर, किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक जुटे एक मंच पर
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के अधीनस्थ राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा में आयोजित 65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यशाला के दूसरे दिन गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता बैठक आयोजित हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ एम एल जाट रहे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक फसल विज्ञान डॉ डी के यादव विशिष्ट अतिथि तथा श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु डॉ पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने अध्यक्षता की।
बैठक में देशभर से आए वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं एवं जौ की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने, बदलती जलवायु के अनुरूप फसल सुधार, मृदा एवं जल संरक्षण तथा वर्ष 2047 तक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की भावी अनुसंधान रणनीति पर मंथन किया।
डॉ एम एल जाट ने गेहूं एवं जौ अनुसंधान को और सुदृढ़ करने पर जोर देते हुए राजस्थान में विभिन्न फसलों के लिए नए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने तथा वर्तमान केंद्रों को मजबूत करने की घोषणा की। उन्होंने विज्ञान आधारित, टिकाऊ एवं संसाधन-दक्ष कृषि प्रणाली विकसित करने को समय की आवश्यकता बताया।
इसी क्रम में डॉ एम एल जाट ने राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थानए दुर्गापुरा में जौ की फसल को बढ़ावा देने के लिए परियोजना समन्वयक प्रकोष्ठ खोलने की घोषणा की। इससे जौ अनुसंधान, समन्वय एवं तकनीकी गतिविधियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। डॉ डी के यादव ने जलवायु परिवर्तन, मृदा में बढ़ती क्षारीयता, दोहरे उद्देश्य वाली जौ की किस्मों, जैविक उत्पादन तथा जैव-सुदृढ़ीकृत किस्मों को अनुसंधान में प्राथमिकता देने पर बल दिया। डॉ पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की अनुसंधान उपलब्धियों एवं विकसित उन्नत किस्मों की जानकारी दी।
इस अवसर पर विभिन्न अनुसंधान केंद्रों की टीमों को नवीन गेहूं एवं जौ की किस्मों के विकास के लिए सम्मानित किया गया तथा तकनीकी पुस्तिकाओं एवं प्रयोगात्मक पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। सर्वश्रेष्ठ अखिल भारतीय समन्वित गेहूं अनुसंधान परियोजना पुरस्कार जूनागढ़ केंद्र को दिया गया। कृषि अनुसंधान एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ एम एल जाट को वी एस माथुर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा के निदेशक डॉ सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अतिथियों द्वारा संस्थान परिसर में पौधारोपण भी किया गया।
बैठक में कृषि विश्वविद्यालय कोटा की कुलगुरु डॉ विमला डूकवाल, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ त्रिभुवन शर्मा, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ सुरेंद्र सिंह सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, वैज्ञानिक एवं देशभर से आए गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में निदेशक अनुसंधान डॉ उम्मेद सिंह ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।