
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, राजस्थान राजेश कुमार यादव की अध्यक्षता में बुधवार को शिक्षा संकुल में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईएमएटी) की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना, शैक्षिक क्षमता-वर्धन तथा उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान की मार्गदर्शिका के अनुरूप एसआईईएमएटी की आगामी गतिविधियों को आवश्यकता आधारित एवं परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शैक्षिक नेतृत्व, नेतृत्व कौशल, विद्यालय आधारभूत संरचना, संसाधन जुटाना, लैंगिक संवेदनशीलता एवं आदर्श विद्यालय वातावरण जैसे विषयों को शामिल करने पर चर्चा हुई। विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण, मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक-भावनात्मक अधिगम को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने की रूपरेखा पर भी विचार किया गया। ओटीएस के सहयोग से डिजिटल सामग्री विकसित कर प्रशिक्षणों को आधुनिक डिजिटल संसाधनों से समृद्ध करने पर जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत वर्ष 2026-27 में 35 लाख शिक्षार्थियों को साक्षर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 19 अगस्त तक 28.67 लाख, अर्थात 81.90 प्रतिशत शिक्षार्थियों का सर्वे किया जा चुका है। शेष लक्ष्य समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए। शिक्षा संबल ऐप के माध्यम से प्रभावी निगरानी, बी.एड., डी.एल.एड., स्काउट-गाइड तथा एनसीसी/एनएसएस विद्यार्थियों को स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में जोड़ने तथा उन्हें ऑनलाइन पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए पृथक कार्ययोजना तैयार करने, राजकीय विद्यालयों के कक्षों का आवश्यकता अनुसार उपयोग तथा उपलब्ध बजट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने गत वर्ष साक्षर हुए लगभग 35 लाख व्यक्तियों में पात्र शिक्षार्थियों को राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, जयपुर के माध्यम से कक्षा 10वीं एवं 12वीं की शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए। इस पहल को ‘साक्षरता से शिक्षा, शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। 10वीं एवं 12वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को पुनः परीक्षा, नामांकन, परीक्षा कार्यक्रम एवं शुल्क संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के लिए उनके एसएसओ पहचान-पत्र, एसएमएस एवं व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचना देने पर जोर दिया गया। साथ ही राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए प्रेरित करने हेतु प्रेरक वीडियो एवं सफलता की कहानियों का प्रसार करने के निर्देश दिए गए।
अन्य राज्यों के साथ समन्वय कर वहां स्कूली शिक्षा से वंचित शिक्षार्थियों को भी राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से जोड़ने के प्रयास करने के निर्देश दिए गए। राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की सचिव डॉ. अरुणा शर्मा ने पात्र शिक्षार्थियों तक प्रभावी पहुंच बनाकर उन्हें शिक्षा की निरंतरता के लिए प्रेरित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने की बात कही।