तीन दिवसीय कार्यशाला दुसरे दिन कल कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा करेंगे बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट विशिष्ट अतिथि, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान करेंगे
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में गेहूं एवं जौ अनुसंधान से संबंधित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यशाला के प्रथम दिन देश-विदेश के कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों तथा गेहूं एवं जौ अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता एक मंच पर जुटे।
प्रथम दिन के वैज्ञानिक सत्रों में जोनल कोऑर्डिनेटर एवं अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के विभिन्न केंद्रों की प्रस्तुतियां हुईं। इनमें चल रहे अनुसंधान, फसल सुधार, क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान तथा वर्ष 2026-27 की अनुसंधान कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। फसल सुधार सत्र में गेहूं एवं जौ की उन्नत एवं जलवायु अनुकूल किस्मों, रोग एवं कीट प्रतिरोधकता तथा अधिक उत्पादन क्षमता पर वैज्ञानिकों ने विचार साझा किए। संसाधन प्रबंधन सत्र में जल, मृदा एवं पोषक तत्वों के दक्ष उपयोग तथा फसल सुरक्षा सत्र में रोग-कीटों के समेकित प्रबंधन पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने बदलते जलवायु परिदृश्य में टिकाऊ एवं अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों के विकास पर जोर दिया।
जौ फसल सुधार सत्र में जौ की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं विभिन्न उपयोगों के अनुरूप उन्नत किस्मों के विकास पर विचार-विमर्श किया गया। गेहूं न्यूट्रिएंट यूज़ एफिशिएंसी सत्र में नाइट्रोजन एवं अन्य पोषक तत्वों के कुशल उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की तकनीकों पर मंथन हुआ।
कार्यशाला के दौरान वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी की बैठक भी आयोजित की गई। इसमें विभिन्न उन्नत किस्मों की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधकता एवं क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।
देशभर से आए वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान अनुभव साझा किए तथा गेहूं एवं जौ की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवीन अनुसंधान एवं तकनीकी रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। वैज्ञानिकों ने संस्थानों के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में कम जल एवं कम पोषक तत्वों में अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में देश में रिकॉर्ड 120 मिलियन टन गेहूं उत्पादन हुआ, जो भारतीय कृषि अनुसंधान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कल होगा दूसरे दिन कार्यशाला का उद्घाटन – कार्यशाला के दूसरे दिन राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान करेंगे।
दूसरे दिन गेहूं एवं जौ अनुसंधान से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित होंगे। इनमें अनुसंधान की भावी दिशा, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों, संसाधन उपयोग दक्षता, फसल सुधार तथा किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।