अब कतारों से मिलेगी मुक्ति, ऑनलाइन होगा पंजीयन

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जिले के चिकित्सालयों में पंजीयन क्यूआर कोड किए चस्पा

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/  परिष्कार पत्रिका जयपुर। जांच से पूर्व पर्ची कटवाने के लिए कतारों में लग रहे मरीज एवं तीमारदारों को अब कतारों से मुक्ति मिलेगी। इसके लिए आभा आधारित ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा शुरू कर दी गई है। मरीज एवं तीमारदारों की सुविधा के लिए जिले के अस्पतालों के ओपीडी पर्ची केन्द्र के बाहर समेत अन्य कई जगहों पर पंजीयन क्यूआर कोड चस्पा किए गए है ताकि यहां आने वाले मरीज क्यूआर कोड से ऑनलाइन पंजीयन करवा सके। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही मरीज का ओपीडी पंजीयन हो जाएगा। इसके बाद वो टोकन संख्या के आधार पर संबंधित चिकित्सक से जांच करवाकर परामर्श ले सकेंगे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि इसके लिए लोगों के आभा कार्ड भी बनाए जा रहे हैं। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड के तहत ये कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमे प्रत्येक व्यक्ति का अलग अलग स्वास्थ्य अकाउंट होगा।

यह सुविधा शुरू होने से पर्ची के लिए कतार से लोगों को राहत मिलेगी। अभी मरीजों को जांच से पहले कंप्यूटर आधारित ऑफलाइन पर्ची जारी की जाती है। इसके लिए मरीजों को पर्ची काउंटर पर कतारों में लगना पड़ता है। हालांकि यहां पर्ची काउंटर दो है, लेकिन मौसमी बीमारियों के सीजन में मरीजों की तादाद अधिक होने पर लोगों को काफी देर तक कतार में लगना पड़ता है। जिससे चिकित्सकीय जांच के लिए समय भी बचेगा।

ऐसे काम करेगा क्यूआर कोड :

अस्पताल पहुंचने पर सबसे पहले क्यूआर कोड स्कैन करना होगा, आभा एप डाउनलोड करें तथा उसमें पंजीयन करें, अस्पताल के साथ अपनी प्रोफाइल साझा करे, टोकन नंबर आने पर काउंटर से स्लिप लेकर चिकित्सक से परामर्श ले

उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (स्वास्थ्य) डॉ. सुरेंद्र कुमार गोयल ने बताया कि पूर्व में मरीजों से पर्ची शुल्क वसूला जाता था। एमआरएस फंड में जमा राशि छोटे मोटे कार्यों व कार्मिकों का मानदेय चुकाने में काम आती थी। अब यह सुविधा निशुल्क है। क्यूआर कोड पंजीयन व्यवस्था शुरू होने के बाद मरीज के केवाईसी से पंजीयन के बाद प्रति मरीज अस्पताल को 20 रुपए मिलेंगे। वहीं चिकित्सक को आभा एप के जरिए दिखाने पर भी प्रति मरीज 5 रुपए मिलेंगे। इससे एमआरएस फंड में भी बढ़ोतरी होगी। ऑनलाइन पंजीयन के बाद जांच रिपोर्ट लेने के लिए भी मरीज को कतार में नहीं लगना पड़ेगा। जांच रिपोर्ट भी एप पर अपलोड होगी। जिससे मरीज घर बैठे ऑनलाइन देख सकेगा। मरीज दूसरे चिकित्सक या जिला मुख्यालय के बड़े अस्पतालों में जांच करवाने जाते हैं तो आभा आईडी से ही पिछली जांच देखी जा सकेगी। वहीं मरीज इसके माध्यम से अस्पताल के चिकित्सकों से ऑनलाइन परामर्श भी ले सकेंगे।

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