पारंपरिक चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद )को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना का होगा पायलट प्रोजेक्ट शुरू

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। प्रमुख शासन सचिव आयुष विभाग श्री सुबीर कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को शासन सचिवालय में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना की राज्य स्तरीय कमेटी की अंतर विभागीय समन्वय एवं समीक्षा हेतु बैठक का आयोजन हुआ।

प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना को राज्य के प्रत्येक जिले में पांच पंचायत में  210 आयुष्मान आरोग्य मंदिर द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जाना है इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के द्वारा स्वास्थ्य संवर्धन करना। यह संभवत प्रदेश का पहला प्रोजेक्ट है जहां मरीज को उसकी प्रकृति वात-पित्त -कफ को जानकर  रोगों की रोकथाम के लिए पूर्व में ही औषधि एवं डाइट चार्ट (आहार विहार संबंधित सुझाव) उपलब्ध कराना है।

कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना का  समयबद्ध तरीके से लागू कर आम जनता तक पहुंचाना है। प्रमुख शासन सचिव ने बैठक में सुझाव दिए की योजना को प्रभावी बनाने के लिए प्रचार प्रसार करें महिलाएं एवं बच्चियों में खून की कमी के को दूर करने के लिए रोग निरोधक सिद्धांत पर कार्य करने वाली आयुर्वेद औषध का भी वितरण करें,6 माह से 5 साल तक के शिशु के लिए स्वर्ण प्राशन (बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली एक विशेष औषधि)का वितरण करें, गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव से पूर्व पोषण देने लड्डू व प्रसूता महिलाओं के लिए जापे वाले लड्डू का वितरण किया जाना चाहिए, ग्राम स्तर पर सरपंच को योजना में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करें व लिखित में सहमति सुनिश्चित करें और जिन गांवों में मॉडल सरपंच है उनको जरूर सम्मिलित करें।

योजना को सफल बनाने के लिए पंचायती राज विभाग, आयुष विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग शिक्षा, विभाग सूचना एवं जनसंपर्क विभाग एवं वन विभाग अंतर विभागीय समन्वय  करेंगे। इसी क्रम में जिला स्तर, ब्लॉक स्तर पर भी शीघ्र समितियाँ गठित की जाएंगी, सभी विभागों से चर्चा कर 18 सूचकांक (इण्डिकेटर) तय किये गए जिन्हे पूरा करने वाली ग्राम पंचायत को राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन के रूप में 11 लाख रूपये की राशि प्रदान की जाएगी।

बैठक में पंचायती राज विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, एकीकृत बाल विकास विभाग,शिक्षा विभाग,आयुष विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग, यूनिसेफ़ के अधिकारी एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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