
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में पहल
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यालय स्तर की चुनौतियों को समझने तथा उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में शिक्षा विभाग द्वारा ‘बातचीत’ कार्यक्रम की पहल की गई है। इसी क्रम में राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त, समग्र शिक्षा डॉ. रश्मि शर्मा ने बुधवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेवात बालिका आवासीय विद्यालय, चनिया का बास (मुहवा खुर्द), ब्लॉक मालाखेड़ा, अलवर में ‘बातचीत’ कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से सीधा संवाद किया।
विद्यालयी चुनौतियों और सुझावों पर हुआ खुला संवाद—
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना, जमीनी स्तर के अनुभवों एवं चुनौतियों को समझना तथा शिक्षकों के सुझावों के आधार पर सुधार की दिशा तय करना है।
इस अवसर पर बालिकाओं के नामांकन, नियमित उपस्थिति, शिक्षा में निरंतरता, विद्यालयी वातावरण तथा बालिकाओं की आकांक्षाओं सहित शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ खुलकर चर्चा की गई। शिक्षकों ने विद्यालय में अपने अनुभवों, अपेक्षाओं एवं व्यावहारिक चुनौतियों को साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
विद्यालय स्तर की आवाज को समझना आवश्यक—
डॉ. रश्मि शर्मा ने संवाद के दौरान विद्यालयी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को समझने पर जोर दिया। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों एवं अन्य सहयोगियों की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बेहतर शिक्षा के लिए केवल नीतियों एवं योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यालय स्तर की आवाज को सुनना, जमीनी अनुभवों को समझना और प्राप्त सुझावों के आधार पर व्यावहारिक समाधान विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।
‘बातचीत’ कार्यक्रम शिक्षा व्यवस्था को सहभागी एवं संवादपरक बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। बातचीत से समझ, समझ से समाधान और समाधान से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर बढ़ने का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।