सेंट जेवियर्स स्कूल नेवटा में आयोजित एजूकेशन समिट 2026 में छह दिनों में 45 सत्रों में राष्ट्रीय विमर्श



ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। शहर के प्रतिष्ठित आयोजनों में शामिल जयपुर एजुकेशन समिट २०२६ के सातवें संस्करण का भव्य शुभारंभ सेंट जेवियर्स स्कूल नेवटा जयपुर में किया गया। कार्यक्रम के आयोजक सुनील नरनौलिया और सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रिंसिपल फादर संगीथराज एसजे ने बताया यह शिखर सम्मेलन छह दिवसीय ऑफलाइन और ऑनलाईन माध्यम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ। जिसमें सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा के प्राचार्य एवं वेन्यू पार्टनर रेवण् फादर संगीत राज एसजे ने विद्यार्थियों, विशिष्ट अतिथियों और बुद्धिजीवियों का पाँच दिवसीय समिट में हार्दिक स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने नैतिक मूल्यों से युक्त, सामाजिक रूप से सजग और भविष्य के लिए तैयार नागरिकों के निर्माण में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समिट ऐसा मंच है जहाँ विचारों पर प्रश्न उठाए जाते हैं, दृष्टिकोण विस्तृत होते हैं और युवा मनों को समकालीन चुनौतियों से सार्थक रूप से जुडऩे के लिए सशक्तकिया जाता है।
शैक्षणिक विमर्श की शुरुआत प्रथम सत्र विश्व गुरु या सिफऱ् सपना एआई के दौर में भारतीय शिक्षा प्रणाली की चुनौतियां और समाधान से हुई। इस सत्र में पूर्व महापौर एवं सेवानिवृत्त आईआरएस अभिजीत कुमार प्रो विजयशेखर चेल्लाबोइना, कुलपति जेकेएलयू जयपुर तथा डॉ फादर अब्राहम अमलराज एसजे, सहायक प्राध्यापक कंप्यूटर साइंस ज़ेवियर्स इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर ने अपने विचार साझा किए। पंकज चड्ढा द्वारा संचालित इस चर्चा में एआई के युग में भारत के वैश्विक ज्ञान-नेतृत्व के लक्ष्य, शिक्षक-तैयारी, तकनीक के नैतिक उपयोग और प्रणालीगत सुधारों पर गहन विमर्श हुआ।
सत्र 2 में युवाओं की प्लेट में ज़हर क्या है फास्ट फूड की सच्चाई ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा। डॉ मेधावी गौतम, सीनियर कंसल्टेंट डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट तथा नोरीन बी पांडे, प्राचार्य, तिलक ग्लोबल स्कूल, जयपुर ने पोषण फास्ट फूड संस्कृति और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर व्यावहारिक और जागरूक करने वाले विचार साझा किए। इस सत्र का संचालन योगिता गोस्वामी, टीजीटी हिंदी एवं हाउस मॉडरेटर, सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा ने किया।
अत्यंत जीवंत और विद्यार्थियों को गहराई से जोडऩे वाले सत्र 3 में संगीत का समाजशास्त्र लोकगीत, गज़़ल और बॉलीवुड से हुआ। इस सत्र में रविंद्र उपाध्याय, समर्थ स्वरूप और जावेद हुसैन जैसे ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने सहभागिता की। जबकि संचालन सुमंत मुखर्जी ने किया। संवाद के साथ-साथ लाइव प्रस्तुतियों ने सत्र को विशेष बना दिया। इस सत्र का प्रमुख आकर्षण समर्थ स्वरूप द्वारा उनके नवीनतम गीत मन जुगनू की प्रस्तुति रही। जिसे हाल ही में टी-सीरीज़ के साथ रिलीज़ किया गया है। तीनों गायकों की सशक्तप्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभागार संगीतए संस्कृति और युवा ऊर्जा के उत्सव में परिवर्तित हो गया।
नीति से व्यवहार, करियर और राष्ट्रीय चिंतन
समिट का दूसरा दिन अपनी विशेष बौद्धिक गरिमा के लिए उल्लेखनीय रहा, विशेष रूप से दो पद्मश्री सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति ने इस दिन को समिट की यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव बना दिया। सत्रों का फोकस नीति को व्यवहार में उतारने, उभरते करियर विकल्पों और सतत रोजगार मॉडल्स पर रहा, जो शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध हुआ।
दिवस की शुरुआत“Beyond Creativity – Designing Careers That Actually Pay” सत्र से हुई। इसमें अनुराग एस.ए लेखक एवं संस्थापक, पेंसिलबॉक्स डिज़ाइन कंसल्टेंसीय ध्वनि, लेखिका एवं संस्थापक काइविंग्स बिजऩेस कंसल्टेंसीय तथा निमिषा सेठ, प्राचार्य, इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट जयपुर ने अपने अनुभव साझा किए। ब्लेसी जो टीजीटी इंग्लिश सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा द्वारा संचालित इस सत्र में रचनात्मक करियर उद्यमिता और उद्योग-अनुकूल कौशल विकास पर व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए।
इसके पश्चात “From Policy to Practice: NEP 2020 and the Future of Learning”सत्र आयोजित हुआ। पैनल में प्रो संदीप संचेती, वाइस प्रेसिडेंट एल्सेवियर इंडिया एवं पूर्व अध्यक्ष मणिपाल यूनिवर्सिटीय प्रो मनोज गुप्ता, प्रो.प्रेसिडेंट पूर्णिमा यूनिवर्सिटी जयपुर तथा प्रो डॉ अजय कुमार डीन ग्रेजुएट आउटकम्स, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर शामिल रहे। इस सत्र का संयुक्तसंचालन डॉ पी एम भारद्वाज, पूर्व एमडी/सीएमडी चार पीएसयू एवं राष्ट्रीय स्तर के मोटिवेशनल एवं मैनेजमेंट गुरु तथा रंजना पनिगर, टीजीटी फे्रंच, सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा ने किया। चर्चा में एनईपी 2020 के क्रियान्वयन की चुनौतियों, अवसरों, परिणाम-आधारित शिक्षा और संस्थागत तैयारियों पर विशेष बल दिया गया।
दिवस 2 का बौद्धिक शिखर रहा सत्र ऑक्सीजन भी ऑपच्र्युनिटी भी रोजगार के नए ग्रीन मॉडल। इस सत्र में प्रो डॉ एन एस राठौड़ पूर्व कुलपति, एमपीयूएटी उदयपुरय पद्मश्री सुंडा राम वर्मा, प्रख्यात पर्यावरणविद्य तथा पद्मश्री जगदीश प्रसाद पारीक, सुप्रसिद्ध किसान वैज्ञानिक ने सहभागिता की। डॉ महेंद्र मधुप, वरिष्ठ कृषि पत्रकार द्वारा संचालित इस सत्र ने सतत विकास, हरित रोजगार और जमीनी नवाचार के वास्तविक उदाहरणों से विद्यार्थियों को प्रेरित किया। दो पद्मश्री सम्मानित वक्ताओं की उपस्थिति ने इस सत्र को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता प्रदान की।
दिवस को और अधिक सहभागितापूर्ण बनाते हुए छात्र वाद-विवाद एवं ओपन माइक सत्रों ने युवाओं को अपने विचार और दृष्टिकोण आत्मविश्वास के साथ व्यक्तकरने का मंच दिया। मानसी नर्नोलिया, प्रबंध निदेशक क्रेडेंट टीवी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और विजेताओं को सम्मानित किया। सुनील नर्नोलिया, निदेशक क्रेडेंट टीवी सहित संस्थागत नेतृत्व की उपस्थिति ने समिट की सहयोगात्मक भावना को और सुदृढ़ किया।


जयपुर एजुकेशन समिट 2026 नीति, उद्देश्य और संभावनाओं का सशक्त संगम :
जयपुर एजुकेशन समिट 2026 जिसका आयोजन सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा जयपुर में किया गया है, ने एक प्रभावशाली और प्रेरणादायी शुरुआत की। बौद्धिक गहराई, छात्र-केंद्रित संवाद और सांस्कृतिक जीवंतता से परिपूर्ण इन दो दिनों ने समिट को शिक्षा, रोजगार योग्यता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद का एक प्रभावी मंच बना दिया। प्रतिष्ठित नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्वों, लेखकों और कलाकारों की सहभागिता ने समिट को विशेष गरिमा प्रदान की।
समिट का दृष्टिकोण : समग्र रूप से जयपुर एजुकेशन समिट 2026 के पहले दो दिनों ने नीतिए व्यवहार, प्रस्तुति और सहभागिता का एक सशक्त और समृद्ध संगम प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित वक्ताओं, पद्मश्री सम्मानित अतिथियों और जीवंत छात्र सहभागिता के साथ यह समिट जागरूक, प्रेरित और भविष्य-उन्मुख शिक्षार्थियों के निर्माण के अपने संकल्प को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य, शास्त्र और संवाद से सजा एक अविस्मरणीय दिवस :
जयपुर एजुकेशन समिट 2026 के तीसरे दिन का आयोजन सेंट ज़ेवियर्स स्कूल, नेवटा जयपुर में अत्यंत प्रभावशाली, संवेदनशील और विचारोत्तेजक वातावरण में सम्पन्न हुआ। आयोजित तीनों सत्र विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए मंत्रमुग्ध कर देने वाले रहे, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य, भारतीय शास्त्रों की आधुनिक प्रासंगिकता तथा प्रभावी संवाद-कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन और सार्थक विमर्श हुआ।
स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा क्यों ज़रूरी है :
दिवस की शुरुआत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे अत्यंत संवेदनशील और समयानुकूल विषय से हुई। इस सत्र में डॉ शिव गौतम, निदेशक एवं प्रोफेसर मनोरोग विभाग जीआईएचबीएएम जयपुर तथा डॉ रुचिरा सोलंकी सीईओए टैगोर ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशंस ने विद्यालयी शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा की अनिवार्यता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सत्र का संचालन डॉ गिरिजा सिंह, पूर्व पीजीटी एवं एचओडीए एमजीडी तथा शिक्षाविद् एवं काउंसलर ने किया। वक्ताओं ने छात्रों में बढ़ते तनाव, भावनात्मक चुनौतियों और मानसिक सुदृढ़ता को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया। यह सत्र अत्यंत संवेदनशील, संवादात्मक और विद्यार्थियों से गहराई से जुडऩे वाला रहा।
शास्त्रों से समाधान तक – प्राचीन भारतीय संस्कृति आधुनिक जीवन के रहस्यों को कैसे सुलझाती है :
दूसरे सत्र में भारतीय शास्त्रों और सांस्कृतिक परंपराओं की आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता पर गहन विचार किया गया। इस सत्र में प्रो डॉ सुधि राजीव पूर्व कुलपति एचजेयूएमसी जयपुर प्रो डॉ के के शर्मा, पूर्व कुलपति एमडीएसयू अजमेर तथा डॉ जी एल शर्मा वरिष्ठ आरएएस अधिकारी लेखक एवं चिंतक ने अपने समृद्ध अनुभव और चिंतन साझा किए। सत्र का संचालन डॉ राकेश कुमार, शिक्षाविद् साहित्यकार एवं फिल्म समीक्षक ने किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि भारतीय शास्त्र केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि वे आज के जीवन की जटिल समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने वाली जीवंत ज्ञान-परंपरा हैं। यह सत्र बौद्धिक रूप से अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।
आवाज़ में असर, शब्दों में वजऩ- सक्सेसफुल कम्युनिकेशन के सीक्रेट्स :
दिवस का समापन एक अत्यंत जीवंत, प्रेरक और ऊर्जा से भरपूर सत्र के साथ हुआ, जिसने विद्यार्थियों को प्रभावी संवाद और अभिव्यक्तिकी शक्ति से परिचित कराया। इस सत्र में इकराम राजस्थानी पूर्व निदेशक ऑल इंडिया रेडियो जयपुर, गीतकार एवं ब्रॉडकास्टरय नेकीराम आर्य, वरिष्ठ वक्ता एवं संवाद विशेषज्ञय तथा रेशमा ख़ान पूर्व सहायक निदेशक एवं प्रोग्राम हेड एफएम रेडियो पिंकसिटी एवं आकाशवाणी जयपुर ने अपने अनुभवों के माध्यम से संवाद-कौशल के व्यावहारिक सूत्र साझा किए।
सत्र का संचालन डॉ फिरोज़ ख़ान, कवि एवं जन टीवी के पत्रकार ने किया। वास्तविक उदाहरणों, संवाद अभ्यास और प्रस्तुति शैली के प्रभावी तरीकों के माध्यम से यह सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। श्रोताओं की सक्रिय भागीदारी ने इस सत्र को विशेष रूप से स्मरणीय और प्रेरणादायी बना दिया।
समग्र प्रभाव : जयपुर एजुकेशन समिट 2026 का तीसरा दिन मानसिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक चेतना और प्रभावी संवाद का एक दुर्लभ और संतुलित संगम बनकर उभरा। तीनों सत्रों ने न केवल ज्ञानवर्धन किया, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मचिंतन, आत्मविश्वास और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। यह समिट की यात्रा में एक भावनात्मक, बौद्धिक और प्रेरणादायी मील का पत्थर सिद्ध हुआ।