
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक महासंघ (NUBC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डी.पी. यादव ने अपने एक दिवसीय जयपुर प्रवास के दौरान प्रेस एवं मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि NUBC देश के सबसे पुराने सामाजिक न्याय संगठनों में से एक है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) तथा अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके समग्र उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत है। यादव ने कहा कि संविधान में सामाजिक न्याय की भावना को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, किंतु आज भी देश के अनेक राज्यों में पिछड़े, दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समुदायों को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की सेवाओं एवं संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जबकि राजस्थान में वर्तमान में केवल 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ स्पष्ट अन्याय एवं भेदभाव है।
उन्होंने राजस्थान सरकार से मांग की कि राज्य में भी अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण को तत्काल 27 प्रतिशत किया जाए, ताकि युवाओं को सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अन्य अवसरों में समान भागीदारी प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित करने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है।
यादव ने कहा कि देश एवं प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 50 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भी बड़ी जनसंख्या है, किंतु उनकी जनसंख्या के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक सेवाओं, सार्वजनिक संस्थानों एवं नीति-निर्माण में पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज के सभी वर्गों को समान अवसर एवं सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा। यादव ने कहा कि देश एवं प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 50 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति एवं जनजाति की भी बड़ी जनसंख्या है, किंतु उनकी जनसंख्या के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक सेवाओं, सार्वजनिक संस्थानों एवं नीति-निर्माण में पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज के सभी वर्गों को समान अवसर एवं सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि NUBC पिछले सात दशकों से सामाजिक न्याय की लड़ाई को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से आगे बढ़ा रहा है। संगठन का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं एवं रोजगार के लिए प्रेरित करना, महिलाओं के सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करना तथा सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित कराने के लिए निरंतर प्रयास करना है।
उन्होंने बताया कि महासंघ समय-समय पर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मेलन, संगोष्ठियां, जनजागरण अभियान, प्रशिक्षण शिविर, विधिक सहायता शिविर, सामाजिक समरसता कार्यक्रम तथा अधिकार जागरूकता अभियान आयोजित करता है। संगठन समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सरकारों के समक्ष रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करता है तथा आवश्यक होने पर लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन भी संचालित करता है।
यादव ने कहा कि संगठन का लक्ष्य केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, कौशल विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक सम्मान, महिला एवं युवा सशक्तिकरण तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों से सामाजिक न्याय की इस मुहिम में सहभागी बनने का आह्वान किया।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सरकारें संविधान की मूल भावना के अनुरूप सामाजिक न्याय की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करेंगी तो देश के करोड़ों पिछड़े, दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर होगा तथा भारत एक अधिक समतामूलक और सशक्त राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ेगा।
प्रेस वार्ता के अंत में डी.पी. यादव ने कहा कि NUBC भविष्य में भी देशभर में अपने संगठनात्मक विस्तार, जनजागरण अभियानों एवं सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों को और अधिक गति देगा तथा वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहेगा