अलगाव, अकेलापन, अवसाद, नशा, दबाव आदि को हटाने और सकारात्मक वातावरण तैयार करने से संभव है आत्महत्या की रोकथाम- प्रो. जैन

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में आयोजित ‘आत्महत्या रोकथाम’ कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि आत्महत्याओं के बढने के पीछे के कारणों में अवसाद, नशे की लत, सामाजिक व पारिवारिक दबाव, अकेलापन और सामाजिक अलगाव, असफलता या आर्थिक कठिनाई, मानसिक बीमारियां, नकारात्मक वातावरण आदि होते हैं। इनकी रोकथाम के उपायों में खुलकर संवाद करना अर्थात पीड़ित से बात करना और उनकी भावनाओं को समझना, सहानुभूति और सहयोग का भाव रखना, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना, नशे से दूरी बनाना, सकारात्मक वातावरण अर्थात परिवार और समाज में सहयोगी माहौल बनाना है। साथ ही फर्जी सोशल मीडिया से जुड़ाव को हटा कर उससे दूरी बनाना भी है। कार्यक्रम में उन्होंने छात्राध्यापिकाओं एवं संकाय सदस्यों को ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य लोगों में आत्महत्या की समस्या, इसके कारणों और रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाना है। इस दिवस पर दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक संदेश दिए जाते हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठाने से बचाने के लिए सहयोग प्रदान करने पर बल दिया जाता है। इस अवसर पर प्रयास किए जाते हैं कि आत्महत्या को एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचान दिलाई जाएं, मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को उजागर करते हुए समाज में सहयोग, संवाद और सहानुभूति की भावना को बढ़ाने तथा परेशानी  में पड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जाते हैं। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के डॉ. मनीष भटनागर, डा. गिरधारी लाल शर्मा, डॉ. अमिता जैन, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. ममता शर्मा, सुश्री स्नेहा शर्मा आदि संकाय सदस्य एवं बी.एड, बी.ए.-बी.एड एवं बी.एस.सी-बी.एड की छात्राध्यपिकाएं उपस्थित रहीं।

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