पत्रकारिता पेशा नहीं, जीवन जीने का तरीका है: गोपाल शर्मा

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हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में शनिवार को ‘पत्रकारिता: चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर विशेष व्याख्यान

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर।  हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर में शनिवार को ‘पत्रकारिता: चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिविल लाइंस विधायक और वरिष्‍ठ पत्रकार गोपाल शर्मा रहे। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय ने उनका शॉल और श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। स्वागत भाषण में प्रो. पाण्डेय ने पत्रकारिता की नई चुनौतियों और लोकतंत्र में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में श्री गोपाल शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि “जीवन जीने का तरीका” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार समाज और जनता के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, जो घटना घटित होने के बाद उसे तथ्यपरक और प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत करते हैं। एक सशक्त पत्रकार समाज में दिशा देने का काम करता है। उन्होंने कहा कि समाचार की भाषा शिष्ट और सभ्य होनी चाहिए, तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए और उसमें राष्ट्रहित की स्पष्ट झलक दिखाई देनी चाहिए। शर्मा ने कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय के हिंदी भाषा में योगदान की सराहना करते हुए कहा, “जहां का मार्गदर्शन ऐसे लोग कर रहे हैं, वहां की भाषा और संस्कृति का विकास अवश्य होगा।” उन्होंने पत्रकारिता पर सत्ता के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग अक्सर यह नहीं चाहते कि सच्चाई सामने आए, लेकिन पत्रकार अपनी निष्पक्षता और साहस से सच्चाई को उजागर कर सकते हैं। उनके अनुसार, पत्रकारिता एक ऐसा प्रवाह है “जिसमें आप भटक नहीं सकते” और जिसमें सतत ईमानदारी और संतुलन आवश्यक है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकार अपनी खबरों और रिपोर्टों के माध्यम से समाज और देश में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। पत्रकारिता का दायरा केवल सूचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।

इस अवसर पर 14 सितंबर को हिंदी दिवस पर आयोजित निबंध लेखन, कविता लेखन और श्रुति लेखन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया। साथ ही सभी उपस्थित सभी लोगों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई, जिससे कार्यक्रम का सामाजिक संदेश और प्रासंगिकता और भी सशक्त हो गई।

कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के अकादमिक एवं प्रशासनिक समन्वयक डॉ. रतन सिंह शेखावत किया। अंत में छात्र–छात्राओं के लिए प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने पत्रकारिता की चुनौतियों और अवसरों पर उत्साहपूर्वक सवाल पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. शालिनी जोशी ने धन्‍यवाद ज्ञापन किया।  

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