
महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सशक्तीकरण ही वास्तविक प्रगति का आधार —जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपने साथ परिवार का भी उत्थान कर रहीं महिलाएं,घर-घर शौचालय से ‘गरिमा’ को मिला सम्मान, उज्ज्वला योजना से सुधरा स्वास्थ्य स्तर,नारी शक्ति वंदन अधिनियम से ‘आधी आबादी’ की राजनीति में सशक्त होगी भागीदारी- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका डेगाना/जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प चार प्रमुख जातियों महिला, युवा, किसान और मजदूर को सशक्त कर विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके जरिए महिलाएं अपने साथ अपने परिवार का भी उत्थान करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को डेगाना के तिलानेश गांव में आयोजित ग्राम विकास चौपाल में महिलाओं के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं से उनके जीवन में आए परिवर्तन की जानकारी ली और सुझाव भी प्राप्त किए। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और अन्य महिलाओं को भी जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के माध्यम से बेटियों के संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा दिया गया। वहीं, स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनाकर महिलाओं के सम्मान और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इसी प्रकार उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाते हुए रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार आया। इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए आवास उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
उन्होंने पशुपालन एवं डेयरी से जुड़ी महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार डेयरी के माध्यम से पशुपालकों को 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान प्रदान कर रही है। साथ ही, राजीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, लखपति दीदी योजना के तहत मात्र डेढ़ प्रतिशत ब्याज दर पर डेढ़ लाख तक का ऋण उपलब्ध कराकर महिलाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ही सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इसी कड़ी में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को विधानसभाओं और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है, जिससे सरकार की योजनाओं एवं निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य को मजबूत एवं सुरक्षित करने की दिशा में मा वाउचर योजना जैसी पहल शुरू की गई, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी जैसी सेवा निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। इसी प्रकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देते हुए नियमित रूप से दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठजनों को भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है। वहीं, आस्था का सम्मान करते हुए वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा जैसी योजनाएं भी संचालित की कर रही है।
इस अवसर पर जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मंजू बाघमार, राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी, देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश भड़ाना, विधायक अजय सिंह किलक, लक्ष्मण राम कलरू, रेवंतराम डांगा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री से संवाद, सरकार का आभार — पहले मेरे घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। राजीविका से जुड़ने के बाद मैंने सिलाई का काम शुरू किया। इसके बाद मुझे कलस्टर मैनेजर बनाया गया। अब मेरी वार्षिक आय करीब सवा लाख रुपये है। मुझे लखपति दीदी बनाकर सशक्त करने और समाज में अपनी अलग पहचान दिलाने के लिए मैं सरकार की आभारी हूं।
– नीरू सोलंकी, कलस्टर मैनेजर
मेरे पति की आय कम होने के कारण घर चलाना मुश्किल था। लेकिन राजीविका से जुड़ाव मेरी उन्नति का आधार बना। शुरुआत में मैंने छोटा व्यवसाय शुरू किया, जिसमें मेरे पति ने भी पूरा सहयोग किया। धीरे-धीरे हमारी आय बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। आज हमारी सालाना आय लगभग ढाई लाख रुपये है।
– अनिता गौड़, लखपति दीदी
राजीविका से जुड़ने के बाद मेरे जीवन को नई दिशा और पहचान मिली। प्रशिक्षण प्राप्त कर मैं पशु सखी बनी। आज मेरे पास चार भैंसें और एक इलेक्ट्रॉनिक सिलाई मशीन है। पशुपालन और सिलाई कार्य से मुझे हर महीने लगभग 40 हजार रुपये की आय हो रही है। इससे ना केवल मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी मिला है।
– कमला, पशु सखी
एक समय था जब हमारा स्वयं सहायता समूह किराए के भवन से संचालित होता था। राज्य सरकार के सहयोग से आज हमारा अपना भवन है, जिसने हमारे काम को नई पहचान और नई दिशा दी है। वर्तमान में 30-40 महिलाएं हमारे समूह से जुड़कर जूट के बैग, खिलौने और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। लगभग ढाई लाख रुपये की मासिक आय के साथ यह समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है।
– माया, उद्यमी
कभी हमारे घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। सरकार की योजनाओं से आवास और गैस सिलेंडर जैसी सुविधाएं मिलीं। राजीविका से जुड़कर प्लास्टर को-ऑर्डिनेटर बनी और आज गांव में बर्तन बैंक का संचालन कर रही हूं। स्वयं सहायता समूह से तीन बार ऋण मिला, जिसने मुझे आत्मनिर्भर बनाया। अब मैं अन्य महिलाओं को भी समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनने की राह दिखा रही हूँ।