कॅरियर निर्माण में जैन दर्शन के अध्येताओं के लिए पर्याप्त अवसर- प्रो. त्रिपाठी

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जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म-दर्शन विभाग में दो दिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम संपन्न
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/  परिष्कार पत्रिका लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम का समापन मंगलवार को किया गया। समापन समारोह में अपने सम्बोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि सभी विद्यार्थियों के कॅरियर निर्माण की समस्याएं रहती हैं, किंतु जैन दर्शन से अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को कॅरियर निर्माण के पर्याप्त अवसर मिल जाते हैं। देश के बहुत से विश्वविद्यालयों में जैन दर्शन का अध्ययन कराया जाता है और राजस्थान के बहुत से कॉलेज में भी जैन दर्शन पढ़ाया जाता है। जैन दर्शन से अध्ययन करने वाले छात्र प्रायः पहली बार में ही जेआरएफ और नेट की परीक्षा उत्तीर्ण कर लेते हैं,  अतः उन्हें 5 साल तक अच्छी स्कॉलरशिप मिलती है। साथ ही वे असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता भी अर्जित कर लेते हैं और जब कहीं भी साक्षात्कार होते हैं, तो उन्हें नियुक्ति भी मिल जाती है। इसके अतिरिक्त देश में कई जैन दर्शन के शोध संस्थान हैं, जहां उन्हें कार्य करने का अवसर भी मिलता है। विदेश में बहुत सारे संस्थानों में अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को अवसर मिलते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित : सह आचार्य डाॅ. रामदेव साहू ने जैन दर्शन में पीएचडी करने की तैयारी के संदर्भ में प्रकाश डाला। छात्रों को लाइब्रेरी विजिट भी कराया गया तथा उन्हें विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी कराई गई और पांडुलिपि संरक्षण योजना के बारे में भी बताया गया तथा संस्थान के विविध विभागों की जानकारी कराई गई। समापन सत्र के पूर्व एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ, जिसका संयोजन सेजल ने किया। इस अवसर पर मुमक्षु मित्तल ने विभिन्न उदाहरण एवं दृष्टांतों द्वारा पावर ऑफ थॉट्स पर प्रकाश डाला। मुमुक्षु प्रेक्षा ने कहानी के माध्यम से सकारात्मक सोच को प्रस्तुत किया। भाविका ने ऋजुता को जीवन का सर्वश्रेष्ठ गुण माना तथा रिद्धि ने काव्यमय प्रस्तुति दी। अंत में डॉ. रामदूव साहू ने आभार ज्ञापन किया।

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