जयपुर बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र — “आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय” का ऐतिहासिक पुनः समर्पण, हजारों ने लिया दिव्यता का अनुभव

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“आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय: आत्म-जागृति का सशक्त माध्यम” — राजयोगिनी जयंती दीदी

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। जयपुर ने एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण का साक्षात्कार किया, जब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा “Museum of Spiritual Legacy (आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय)” को उसके नवीन, भव्य एवं अत्याधुनिक स्वरूप में समाज को पुनः समर्पित किया गया। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित “आध्यात्मिक विरासत समारोह” आध्यात्मिकता, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का विराट उत्सव बनकर उभरा।

सबसे प्रमुख रूप से ब्रह्माकुमारीज की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी ने अपने विस्तृत एवं ओजस्वी संबोधन में कहा कि आज विश्व जिस मानसिक अशांति, तनाव और मूल्यहीनता के दौर से गुजर रहा है, उसका एकमात्र समाधान आत्मिक जागरूकता और आध्यात्मिक जीवनशैली में निहित है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी वास्तविक पहचान—आत्मा—को भूलकर बाहरी उपलब्धियों में सुख खोजता है, जबकि सच्ची शांति भीतर के मूल गुणों—शांति, प्रेम, आनंद और पवित्रता—को जागृत करने से प्राप्त होती है। उन्होंने आगे कहा कि “आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय” केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है, उसे उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने सभी को राजयोग ध्यान को अपनाकर अपने जीवन में स्थायी शांति और संतुलन स्थापित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आध्यात्मिक प्रयास समाज को सही दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ब्रह्माकुमारी संस्थान इस दिशा में निरंतर सराहनीय कार्य कर रहा है।

पूर्व अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग जसबीर सिंह ने संग्रहालय को सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला प्रेरणास्रोत बताया। महासचिव राजयोगी करुणा भाई ने संस्थान की वैश्विक सेवाओं एवं आध्यात्मिक संदेश के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संग्रहालय एक जीवंत प्रेरणा का केंद्र है। जोनल हेड राजयोगिनी बी.के. सुषमा दीदी ने इसे आत्म-जागृति और जीवन परिवर्तन का प्रभावशाली माध्यम बताया, जबकि धार्मिक प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी बी.के. मनोरमा दीदी ने ऐसे आयोजनों को समाज में आध्यात्मिक पुनर्जागरण की आधारशिला बताया।

संग्रहालय के संबंध में जानकारी देते हुए सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी बी.के. चंद्रकला दीदी ने बताया कि यह संग्रहालय लगभग 45×60 वर्गफुट क्षेत्रफल में विकसित किया गया है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक और रचनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से ब्रह्माकुमारी संस्थान के इतिहास, आध्यात्मिक ज्ञान एवं मूल्यों को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें एक शांतिपूर्ण मेडिटेशन रूम, विविध आध्यात्मिक मॉडल्स तथा प्रेरणादायक झांकियाँ शामिल हैं, जो प्रत्येक आगंतुक को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराती हैं। यह संग्रहालय वर्ष 1967 में स्वयं संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की प्रेरणा से आरंभ हुई आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक युग के अनुरूप प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम का शुभारंभ भव्य दीप प्रज्ज्वलन (Candle Lighting Ceremony) से हुआ, जिसने पूरे सभागार को दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। समारोह के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह ने संग्रहालय के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन मूल्यों की गहन अनुभूति प्राप्त की।

समारोह के अंत में सभी विशिष्ट अतिथियों को सम्मानपूर्वक ईश्वरीय सौगात भेंट की गई तथा उपस्थित नागरिकों को ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया गया। यह भव्य एवं दिव्य आयोजन न केवल सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, बल्कि जयपुर शहर में आध्यात्मिक जागरूकता, सकारात्मक सोच और मूल्यनिष्ठ जीवन का सशक्त संदेश भी प्रसारित कर गया।

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