गीता पढे, जीवन को सार्थक बनाएं : देवनानी , गीता मनीषी स्‍वामी ज्ञानान्‍द ने गीता सत्‍संग किया

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देवनानी ने कहा कि गीता व रामायण घर में रखें, संवाद करें और निराशा को दूर करें

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि गीता पढें और निराशा व कुण्‍ठा को समाप्‍त कर जीवन को सार्थक बनाएं। उन्‍होंने कहा कि रामायण व गीता जीवन जीने के लिए कर्म प्रधान ग्रंथ है। देवनानी ने अभिभावकों का आव्‍हान किया कि वे इन दोनों ग्रंथों को घर में रखें। अपने बच्‍चों को इनका अध्‍ययन कराएं। इससे निराशा व कुण्‍डा समाप्‍त होगी और जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी। देवनानी गुरूवार को यहां कॉन्स्टिटयूशन क्‍ल्‍ब ऑफ राजस्‍थान में गीता मनीषी स्‍वामी ज्ञानान्‍द के दिव्‍य गीता सत्‍संग समारोह को सम्‍बोधित कर रहे थे। देवनानी ने स्‍वामी ज्ञानान्‍द का शॉल ओढाकर अभिवादन किया। समारोह में आनन्‍द पोद्धार ने देवनानी का पुष्‍प गुच्‍छ भेंट कर और शॉल ओढाकर अभिनन्‍दन किया। देवनानी ने कहा कि सनातन संस्‍कृति का वातावरण राष्‍ट्र को अनुकूल बना रहा है। राष्‍ट्र नेतृत्‍व भारत को सनातन संस्‍कृति के साथ प्रगति की ओर बढा रहा है। भारत शीघ्र ही विश्‍व गुरू बन जाएगा। देवनानी ने बताया कि उन्‍होंने अपने शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में विद्यालयों में गीता ग्रंथ भिजवाये थे। देवनानी ने नैतिकता की शिक्षा की आवश्‍यकता प्रतिपादित करते हुए कहा कि नैतिक शिक्षा के लिए गीता अध्‍ययन जरूरी है। इस अवसर पर जसवीर सिंह, योगी मनीष, हेमन्‍त सेठीया सहित अनेक गणमान्‍य नागरिक मौजूद थे।  

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