जैविभा विश्वविद्यालय की सहायक आचार्या डॉ. लिपि जैन की नवीन पुस्तक अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण को भेंट

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार लाडनूं ()। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति विभाग की सहायक आचार्या डा. लिपि जैन की नव प्रकाशित पुस्तक ‘महात्मा गांधी : विचार एवं व्यवहार’ की प्रति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ एवं डॉ. लिपि जैन ने विश्वविद्यालय के अनुशास्ता एवं तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण को भेंट की। आचार्य श्री महाश्रमण ने पुस्तक का अवलोकन करने के पश्चात सराहनीय प्रयास बताया तथा अपना आशीर्वाद प्रदान किया। डॉ. लिपि जैन रचित पुस्तक ‘महात्मा गांधीः विचार एवं व्यवहार’ में गांधीजी के व्यक्तित्व, चिंतन और उनके बहुआयामी दर्शन का एक समग्र एवं गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसमें गांधीजी के जीवन-वृत्त, उनके नैतिक एवं आध्यात्मिक आधार तथा सत्य, अहिंसा और ईश्वर संबंधी विचारों का विस्तृत विवेचन किया गया है।

पुस्तक में विभिन्न धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध, ईसाई एवं इस्लाम के गांधी विचारधारा पर पड़े प्रभाव का विश्लेषण करते हुए उनके चिंतन की सार्वभौमिकता को स्पष्ट किया गया है। साथ ही, पाश्चात्य विचारकों जैसे टॉलस्टॉय, रस्किन और थोरो के प्रभावों का तुलनात्मक अध्ययन भी सम्मिलित है। इसमें गांधीवादी अर्थशास्त्र, ग्राम विकास, स्वदेशी, ट्रस्टीशिप, तथा सामाजिक-आर्थिक आदर्शों की समकालीन प्रासंगिकता पर विशेष ध्यान दिया गया है।पुस्तक आधुनिक संदर्भों- जैसे सतत् विकास, उपभोक्तावाद, कॉर्पोरेट गवर्नेस और वैश्विक शांति में गांधीवादी सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोग को भी रेखांकित करती है। यह कृति न केवल एक अकादमिक अध्ययन है, बल्कि वर्तमान समाज के लिए मार्गदर्शक के रूप में भी अत्यंत उपयोगी है। कुलपति प्रो. दूगड़ ने इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण को डॉ. लिपि जैन द्वारा रचित अन्य पुस्तकों ‘विकास: गांधी एवं महाप्रज्ञ दृष्टि’, ‘कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन एंड पीस टेक्नोलॉजी’ एवं ‘वैकल्पिक आर्थिक चिंतन’ की जानकारी देते हुए उनकी प्रतियां भी उन्हें उपहृत की। सभी पुस्तकों का आचार्य श्री महाश्रमण ने अवलोकन किया और डॉ. लिपि जैन की सभी रचनाओं पर प्रशंसा व्यक्त की।

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