जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में श्रावणी पर्व रक्षाबंधन पर मेहंदी और लहरिया महोत्सव आयोजित

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में संस्कृत दिवस सम्बंधी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के साथ ही मेहंदी और लहरिया महोत्सव का आयोजन भी किया गया। मेहंदी व लहरिया महोत्सव में विभागाध्यक्ष प्रो बीएल जैन ने कहा कि यह त्यौहार महिलाओं के लिए विशेष होता है। इसमें सभी छात्राओं ने उत्सुकतापूर्वक हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। छात्राओं ने अलग-अलग रंगों से सराबोर लहरिये पहन करके आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी कला का प्रदर्शन किया और राजस्थान की लोक संस्कृति को उजागर किया। कार्यक्रम में सोनम और ज्योति ने युगल नृत्य, चंचल ने गायन, पलक ने एकल नृत्य, लाछा और समूह ने सामूहिक नृत्य, सुनीता चौधरी ने भाषण, पूजा और सृष्टि ने युगल नृत्य, सरोज चौधरी और पूजा रेगर ने एकल नृत्य की प्रस्तुति दी। ज्ञान-विज्ञान से भरा है संस्कृत साहित्य : संस्कृत दिवस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो बीएल जैन ने संस्कृत दिवस का महतव समझाते हुए कहा कि इस दिवस के पीछे भारत की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उसका प्रचार-प्रसार करने की भावना है। संस्कृत में साहित्य, दर्शन, गणित और विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में शास्त्रीय ग्रंथों का भंडार है। यह प्राचीन भारतीय-आर्य भाषा आज भी शास्त्रों और श्लोकों के माध्यम से फल-फूल रही है। डॉ अमिता जैन ने कहा कि संस्कृत दिवस भारत में प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावणी पूर्णिमा या रक्षा बन्धन ऋषियों के स्मरण तथा पूजा और समर्पण का पर्व माना है। संस्कृत साहित्य के आदि स्रोत ऋषि ही हैं, इसलिए श्रावणी पूर्णिमा को ऋषि पर्व और संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर डॉ लिपि जैन, डॉ आभा सिंह, डॉ ममता पारीक, स्नेहा शर्मा आदि समस्त शिक्षा संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कुसुमलता एवं भूमिका ने किया।

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