
विश्वविद्यालय को नवीन ऊंचाइयां देने, वैश्विक ख्याति दिलाने और नये विभाग और नये पाठ्यक्रम शुरू करने का है श्रेय प्राप्त
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार लाडनूं ()। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के कार्यकाल के दौरान इस विश्वविद्यालय ने नई ऊंचाइयों को छुआ है और देश-विदेश में अभूतपूर्व ख्याति अर्जित की है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति केन्द्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उनके दो सफलतम कार्यकाल के पश्चात् अधिकतम एक वर्ष तक के लिए या नए कुलपति की नियुक्ति फिर से उनका कार्यकाल बढा दिया है। यह निर्णय उन्होंने संस्थान के संविधान की धारा 29 (4) एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रावधानों के अनुरूप लिया।
यहां ध्यान देने योग्य है कि जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के कार्यकाल में आचार्य महाप्रज्ञ मेडिकल कॉलेज आफ नेचुरोपैथी एंड योग की स्थापना हुई। साढे पांच वर्षीय बीएनवाईएस का मेडिकल कोर्स प्रारंभ हुआ और आचार्य महाप्रज्ञ नेचुरोपैथी चिकित्सा केन्द्र से लोगों को लगातार चिकित्सा लाभ मिल रहा है। राजस्थानी साहित्य एवं शोध विभाग की स्थापना की जानकारी राजस्थानी भाषा एवं साहित्य के अन्तर्गत पीएच-डी, स्नातकोत्तर, स्नातक एवं प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों का सफल संचालन किया जाना शुरू हुआ। जैनोलोजी तथा प्राकृत व संस्कृत तथा प्रेक्षाध्यान व अहिंसा प्रशिक्षण, जैन ज्योतिष संगीत आदि प्राच्य व अर्वाचीन विधाओं को नये आयाम मिले। इनमें उच्च शिक्षा के साथ विभिन्न अल्पकालिक पाठ्यक्रमों का प्रारम्भ किया जाकर सफल संचालन किया जा रहा है। इसी प्रकार नए विभागों, नए पाठ्यक्रमों और नई शिक्षा पद्धति के अनुसार समस्त कोर्सेज और पूर्ण शिक्षा व्यवस्था को सर्व प्रथम ढालने, लागू करने में यह अग्रणी विश्वविद्यालय सिद्ध हो पाया। पूर्ण सुरक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों की स्थापना और रैगिंग मुक्त यह पहला विश्वविद्यालय है, जिसने महिला शिक्षा को उच्च आयाम तक पहुंचाया।
प्रो. दूगड़ के कुलपतित्व काल में उनके कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय का सम्पूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर और सारी व्यवस्थाओं व सुविधाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ और उन्हें वैश्विक स्तरीय मानकों के अनुरूप ढाला गया। इन सबके बीच प्राचीन भारतीय ज्ञान परम्परा और मूल्यों को बरकरार रखते हुए किया गया। आज विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों से और देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से एमओयू है। कुलपति प्रो. दूगड़ के नेतृत्व में संस्थान के विभिन्न शिक्षकों ने सतत् अनुसंधान करके अनेक विधियों व यंत्रों का आविष्कार कर उनका विश्व स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर कर पैटेंट भी करवाए हैं। इसी तरह यहां के योग विद्यार्थियों ने प्रेरणा पाकर अनेक विश्व-रिकार्ड कायम किए हैं।