
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका लक्ष्मणगढ़। कभी खेल के मैदान में हाकी की स्टिक व पैरों से फुटबॉल का गोल करने वाले खिलाड़ी ने आईपीएस अफसर बनकर अपनी योग्यता व काबिलियत के दम पर अपराधियो पर नकेल कसते हुए पुलिस महकमे में ऐतिहासिक पारी खेलते हुए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित होने वाले सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ रवि प्रकाश महरडा का सफरनामा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत माना जाता है।
आईपीएस डाॅ. महरडा ने करीब एक लाख सदस्यों वाली सामाजिक संस्था तथा सामाजिक उत्थान व अनुसूचित जातियों की शीर्ष संस्था डॉ अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी राजस्थान के अध्यक्ष निर्वाचित होकर सामाजिक सरोकार के कार्यों को अंजाम दिया। जबकि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में विभिन्न पदों पर दी गई उत्कृष्ट व सराहनीय सेवाओं के लिए सन् 2008 में पुलिस मेडल व सन् 2015 में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित हो चुके हैं। भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में शासकीय प्रयोजनों से फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, इण्डोनेशिया, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व संयुक्त अमेरिका जैसे कई विदेशी राज्यों का दौरा भी कर चुके हैं जिसका लाभ राज्य की जनता को मिला। इससे पहले डॉ महरडा ने जून 2013 से अप्रैल 2014 तक भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली से उच्च स्तरीय व्यवसायिक लोक प्रशासन का कार्यक्रम का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पुनः मई 2014 में मूल विभाग में आकर महानिरीक्षक कोटा रैज, अतिरिक्त महानिदेशक, राज्य आपदा रेस्पोंस दल, अतिरिक्त महानिदेशक, दूर संचार एवं तकनीकी, अतिरिक्त महानिदेशक मानवाधिकार आयोग, अतिरिक्त महानिदेशक, सशस्त्र बटालियन पुलिस, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, सीआईडी अपराध के दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन किया जबकि महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम के बाद महानिदेशक एसीबी व महानिदेशक राजस्थान पुलिस के पद से सेवानिवृत्त हुए।
आईपीएस बनने से पूर्व डाॅ. महरडा ने राजस्थान की जनजातीय उप-योजना – इसकी प्रबंधकीय प्रभावशीलता पर अपना शोध-प्रबंध लिखा था। इस दौरान दक्षिणी राजस्थान की जनजातीय जिलों में सरकारी योजनाओं के कामकाज की जानकारी मिली। आईपीएस के दौरान राजस्थान के 7 जिलों में एसपी के रूप में काम करते हुए कानून और व्यवस्था बनाए रखते हुए अपराध की रोकथाम और अपराध की जांच की तथा गांवों और फील्ड क्षेत्रों में लगातार दौरे कर जनता से बातचीत करने के कारण सरकारी विभागों,विशेषकर पुलिस स्टेशन और पुलिसकर्मियों के काम में जनता को मिलने वाली सेवाओं की कमियों को समझा तथा जनता के साथ इन संवादों से जमीनी स्तर पर सीधा फीडबैक लेकर नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को आगे बढ़ाया । 2006 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान सीआरपीएफ की नई दिल्ली रेंज में डीआईजी के रूप में चार साल से अधिक समय तक काम किया। यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी जिसमें दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए दिल्ली में सीआरपीएफ की 10 बटालियन की तैनाती की निगरानी करना, एसपीजी की बाहरी परिधि सुरक्षा के लिए 1 बटालियन और संसद की सुरक्षा के लिए तैनात 1 बटालियन शामिल थी।
दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ, एसपीजी , गृह मंत्रालय और भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों के साथ बातचीत से डॉ महरडा ने भारत सरकार के विभागों के कामकाज को समझा इस दौरान बहुत सारी जानकारी और सुझाव मिले जिन्हें राज्य पुलिस में लागू किया जा सका। विभिन्न कैडर के अधिकारियों के साथ बातचीत एक समृद्ध अनुभव भी रहा। आईजी सीआरपीएफ के पद पर पदोन्नति के बाद डॉ महरडा की नियुक्ति आईजी श्रीनगर जम्मू-कश्मीर सीआरपीएफ के रूप में हुई। इस दौरान कानून और व्यवस्था तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और अन्य केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों चलाया। यहां के बाद डॉ महरडा की राजस्थान पुलिस में वापसी हुई तथा अगस्त 2014 में आईजी कोटा रेंज के रूप में नियुक्ति हुई। इस दौरान रुद्राक्ष नाम के बच्चे का अपहरण और हत्या का मामला कानून-व्यवस्था और अपराध की जांच दोनों ही लिहाज से बहुत चुनौतीपूर्ण था। लेकिन कोटा पुलिस ने बहुत ही बारीकी और तकनीकी जांच के माध्यम से आरोपियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। यह केस कोटा पुलिस रेंज के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की कड़ी मेहनत और टीम वर्क का नतीजा था। रुद्राक्ष केस आज अपराध जांच, विशेषकर साइबर जांच और पूरी टीम के समन्वय का एक बहुत अच्छा केस स्टडी बन गया है। एडीजी क्राइम ब्रांच में नियुक्ति के दौरान डॉ महरडा ने सीआईडी-सीबी में बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निपटारा किया तथा अपराध से जुड़ी फाइलों को मंगवाकर उनकी जांच की और निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए निर्देश जारी किए। एडीजी सीआईडी-सीबी की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा टर्न से बाहर प्रमोशन की सिफारिश की गई और डीजीपी द्वारा प्रमोशन आदेश जारी किए गए।फरवरी 2023 में डीजी रैंक पर पदोन्नति पर डाॅ महरडा को साइबर क्राइम, टेलीकॉम और तकनीकी सेवाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई। नवगठित साइबर क्राइम ब्रांच के डीजी के रूप में नई शाखा स्थापित करने का चुनौतीपूर्ण काम शुरू किया। इसमें पुलिसकर्मियों को जागरूक करना और प्रशिक्षण देना, साइबर अपराध का ज्ञान फैलाना, शाखा में स्टाफ की भर्ती करना, सरकार से बजट और संसाधन प्राप्त करना, और मानव संसाधन, कौशल व हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर दोनों में क्षमता निर्माण शामिल था। जनवरी 2024 में राजस्थान पुलिस हैकाथाॅन 1.0′ का आयोजन किया जिसमें 28 राज्यों के 1500 प्रतिभागियों ने 3 दिनों तक पुलिस से जुड़ी समस्या-समाधानों पर काम किया। जबकि मई 2024 में डीजी एसीबी के रूप में मिली पोस्टिंग के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत ट्रैप, औचक जांच और डीए के मामलों के जरिए लगातार काम किया। बड़ी संख्या में पुराने लंबित मामलों का निपटारा किया गया। तथा पहली बार 15 जुलाई 2024 को एसीबी स्थापना दिवस का आयोजन किया। तथा डीजी एसीबी के रूप में डॉ महरडा के कार्यकाल में रिकॉर्ड संख्या में ट्रैप और डीए के मामले दर्ज किए गए।
शेखावाटी अंचल के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी में जन्मे रवि प्रकाश महरडा की स्कूली शिक्षा सेन्ट जेवियर स्कूल जयपुर से सन् 1972 से 1983 तक रही। इस दौरान राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के स्कोलर व स्कूल स्तर पर ही हाकी टीम के कप्तान एवं फुटबॉल टीम के सदस्य रहने के साथ साथ छात्र हितों की रक्षा करने हेतु स्कूल यूनियन के अध्यक्ष भी रहे। स्कली शिक्षा के दौरान ही सन् 1983 में जेवियर्स बेस्ट विधार्थी का खिताब हासिल किया। स्कूल शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के दिल्ली का सफर किया जहां सेन्ट स्टीफन्स कालेज दिल्ली से अर्थशास्त्र से स्नातक किया। इस दौरान कालेज में फुटबॉल व हाकी का प्रतिनिधित्व किया। दिल्ली के बाद अहमदाबाद का रुख किया तथा प्रतिष्ठित भारतीय मैनजमेंट संस्थान अहमदाबाद से एमबीए करने के बाद उच्च शिक्षा क्षेत्र में महारथ हासिल करने के लिए अजमेर विश्वविद्यालय से पीएचडी एवं दिल्ली की आई आई पी ए संस्थान से एम फिल की डिग्री हासिल की तथा 1990 में प्रतिष्ठित भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। आईपीएस में चयन होने पर राजस्थान कैडर आवंटित हुआ तथा अपने कैरियर की शुरुआत सहायक पुलिस अधीक्षक कोटा के रूप में की। तथा बाद में राजसमंद, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, पाली, जोधपुर ग्रामीण, उदयपुर, जोधपुर शहर आदि स्थानों पर 2005 तक कानून व व्यवस्था का दायित्व बखूबी निभाया। इसके बाद 2006 से 2013 तक केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स में उप महानिरीक्षक दिल्ली, महानिरीक्षक श्रीनगर, महानिरीक्षक पर्सनल जैसे महत्वपूर्ण पदों के दायित्वों का सफलता पूर्वक संचालन किया। ऐसे बिरले ही व्यक्ति होते हैं जो खिलाड़ी, लोकसेवक व जनसेवक के रूप में लोकप्रियता के शिखर को छू पाते हैं। डॉ महरडा ने एक खिलाड़ी, लोकसेवक व जनसेवक के रूप में राजस्थान में एक उम्दा, बेहतरीन व लाजबाव पारी खेलते हुए लोकप्रियता की हैट्रिक बनाई है।