उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित, कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी रहे उपस्थित

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। उदयपुर जिले के रवीन्द्र नाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय में सोमवार को राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायी एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी तथा विशिष्ट अतिथि उदयपुर शहर के विधायक ताराचंद जैन थे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ विशिष्ट अतिथि ताराचंद जैन द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक ब्रेन डेड व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से आठ गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन प्रदान कर सकता है।  मुख्य अतिथि बाबूलाल खराड़ी ने भारतीय संस्कृति में त्याग एवं मानव सेवा की परंपरा का उल्लेख करते हुए महर्षि दधीचि का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिन्होंने लोककल्याण हेतु अपनी अस्थियाँ दान कर देवताओं की सहायता की थी। उन्होंने कहा कि आज के युग में अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है तथा समाज में अंगदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर प्रत्येक नागरिक को इस अभियान से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

इस अवसर पर अंगदान जागरूकता अभियान एवं अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स एवं सहयोगियों को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया। नोडल ऑफिसर डॉ. तरुण रलोत ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज द्वारा अंगदान जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों, जन-जागरूकता अभियानों एवं शपथ अभियान की जानकारी देते हुए ब्रेन डेथ के वैज्ञानिक पहलुओं, अंगदान की कानूनी प्रक्रिया तथा गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता को सरल भाषा में समझाया।

अंगदान दिवस के अवसर पर नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन जो स्वास्थ्य सेवा से राष्ट्र सेवा के संकल्प से जुड़ा संगठन है, के 100 से अधिक चिकित्सकों एवं मेडिकल विद्यार्थियों ने अंगदान की शपथ लेकर समाज को एक प्रेरणादायी संदेश दिया। इस अवसर पर पूर्व में अंगदान करने वाले स्वर्गीय कान सिंह तथा अंगदान की सहमति प्रदान करने वाले स्वर्गीय कांतिलाल जोशी के परिजनों का अतिथियों द्वारा शॉल ओढ़ाकर, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया। अतिथियों ने उनके इस महान निर्णय को समाज के लिए अनुकरणीय बताते हुए अन्य परिवारों को भी प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

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