क्रीड़ा भारती ने कर्णावती, गुजरात में दिसम्बर 2025 में आयोजित पाँचवें राष्ट्रीय अधिवेशन में भारत में खेलों के विस्तार हेतु “खेल एक मौलिक अधिकार” का प्रस्ताव पारित किया है।

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“खेल एक मौलिक अधिकार” क्रीडा भारती ने पारित किया प्रस्ताव

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर।  “सेवा सदन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल सैनी एवं प्रदेश अध्यक्ष शरद मिश्रा ने पत्रकारों को इस विषय की विस्तृत सूचना देते हुए कहा कि कीड़ा भारती खेलने के अधिकार का आग्रह अपनी स्थापना से ही करती आ रही है। क्योंकि खेल केवल चुनिंदा खिलाड़ियों का विषय न होकर प्रत्येक व्यक्ति का होना चाहिए।

अखिल भारतीय अधिवेशन में खेलों को पारदर्शी, समावेशी एवं खिलाड़ी-केंन्द्रित बनाने का संकल्प

क्रीडा भारती के त्रैवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन में देशभर के खेल तंत्र को अधिक पारदर्शी, समावेशी और खिलाड़ी-केंन्द्रित बनाने हेतु एक महत्ववपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। अधिवेशन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि खेलों को केवल चुनिंदा खिलाड़ियों तक समिति न रखकर प्रत्येक वर्ग और स्तर के व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। खेलों को समावेशी बनाते हुए सभी को समान अवसर प्रदान करना आवश्यक है। साथ ही, खेलों के नियम एवं व्यवस्थाएं ऐसी हों जो भेदभाव को समाप्त करें और खिलाड़ियों के विकास को प्रोत्साहित करें। प्रस्ताव में केन्द्र सरकार की 2025 की खेल नीति के अनुरूप खेलों को जन आंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि खेल केवल प्रतियोगिता तक समिति न रहकर सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन सके। इस दिशा में एक समग्र एवं खिलाड़ी-केंद्रित खेल तंत्र (system) विकसति करने की आवश्यकता बताई गई, जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों, खेल संधों, संस्थाओं तथा निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।

अधिवेशन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खेल गतिविधियों में सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, विभिन्न स्तरों पर नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन कर प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण को मजबूत बनाया जाए, खेलों में समावेशिता एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाए तथा संपूर्ण खेल तंत्र का निर्माण खिलाड़ियों को केन्द्र में रखकर किया जाए। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि खेल संधों की भूमिका खिलाड़ियों के प्रशिक्षिण, चयन प्रक्रिया एवं प्रतियोगिता के संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेलों को गांव-गांव तक पहुंचाने और युवाओं को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।

प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति या समूह को खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन का अधिकार होगा, बशर्ते वे कानून, सुरक्षा नियमों एवं संविधान का पालन करें तथा अधिकारिक प्रतिनिधित्व का दावा न करें। अनुशासन बनाए रखने हेतु यह निर्णय लिया गया कि किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्यवाही का अधिकार राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण या सक्षम प्राधिकरण के पास होगा। इसके अतिरिक्त, खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी रखने तथा खेलों को राजनीति, व्यक्तिगत या संस्थागत पक्षपात से मुक्त रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अधिवेशन में यह भी सुनिश्चित करने की बात कही गई कि प्रत्येक खिलाड़ी को खेल मैदान एवं आधारभूत संरचाएं सुलभहो और उनका उपयोग केवल खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाए।

अंत में देशभर के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों से आह्वान किया गया कि वे मिलकर भारत में एक स्वस्थ, पारदर्शी एवं सक्षम खेल परिस्थितिकी तंत्रों के निर्माण में योगदान दे।

यह प्रस्ताव अहमदाबाद (कर्णवती) में आयोजित अधिवेशन में सर्वसम्मति से पारित किया गया, जो देश में खेलों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रस्ताव:

1) खेल एक मौलिक अधिकार हो।

2) किसी खिलाड़ी या खिलाड़ी समूह (team / संघ) को, किसी सदस्यता/संघ (Membership/Affiliation) की बाध्यता के बाहर रहकर भी अपनी क्षमता और पसंद का खेल खेलनेका तथा सभी प्रतियोगिताओं में सहभागी होकर अपने कौशल को सिद्ध करने की स्वतंत्रता और अधिकार हो।

3) किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह को खेल की प्रतियोगिता आयोजित करने की स्वतंत्रता और अधिकार रहे, जबतक उसका उद्देश्य जिला, राज्य, देश के टीम की चयन प्रक्रिया / चैंपियनशिप रैंकिंग के लिए न हो तथा उसमें राज्य या देश के प्रतिनिधित्व का दावा या आभास न हो और वह स्थानीय नागरी संकेत, सुरक्षा नियम, भारत का संविधान, भारतीय संहिता तथा अधिनियमों का पालन करता हो।

4) किसी कारणवश दंडात्मक कार्यवाही करनी हो तो वह अधिकार राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (NST) या सक्षम न्यायाधिकरण के पास रहे ।

5) राजनीति, व्यक्तिया संस्थागत अभिनिवेश से जोल मुक्त रहे इसलिए जिला, राज्य तथा देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी और संघ की चयन प्रतिश्या के लिए एक पूर्ण पारदर्शी प्रक्रिया (System) स्थापित की जाया

6) प्रत्येक खिलाडी की पहुँच में मैदान तथा आधारभूत संरचना (Infrastructure) उपलब्ध हो तथा खेल के सभी मैदान और आधारभूत सनरचना केवल खेल के लिए संरक्षित हो।

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