महिला केवल विकास की सहभागी नहीं, विकास को गति और दिशा दोनों की सूत्रधार हैं- उप मुख्यमंत्री, दिया कुमारी

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उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी का लाडनूं यात्रा कार्यक्रम—उपमुख्यमंत्री जैन विश्व भारती में आयोजित आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार समारोह में हुई सम्मिलित—उप मुख्यमंत्री को आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में नवाजा गया आचार्य श्री तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार से 

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर।  उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम मिला है। सरकार की हर योजना और अभियान में महिलाएं केन्द्र में है, जिससे देशवासियों की सोच में परिवर्तन आया है। आज महिला केवल विकास की सहभागी नहीं, विकास की गति और दिशा दोनों की सूत्रधार है जो कि हर क्षेत्र में विकसित भारत बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी बुधवार को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित आचार्य श्री तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थी। उन्होंने अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा आयोजित 51 वें वार्षिक महिला अधिवेशन पर बधाई देते हुए देशभर से समागत सभी मातृशक्ति का अभिनन्दन किया और कहा कि आचार्यश्री महाश्रमण और साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा का सानिध्य प्राप्त होना उनका सौभाग्य है। आचार्य तुलसी हमारे आदर्श रहे हैं, उनके नाम से पुरस्कार प्राप्त करना उनके लिए गौरवपूर्ण अवसर है। 

आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में उप मुख्यमंत्री को दिया गया आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार प्रदान—

इस समारोह में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी को इस वर्ष का आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन्हें नारी जागरण, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक उत्थान एवं जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं बहुआयामी योगदान के लिए आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में प्रदान किया गया। इस अवसर पर उन्हें प्रदत्त प्रशस्ति-पत्र में बताया गया है कि दीयाकुमारी एक ऐसा प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में रहते हुए जनकल्याण को अपने कार्यों का केंद्र बनाया है। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री के रूप में वे वित्त, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, सार्वजनिक निर्माण, बाल अधिकार तथा महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व कुशलतापूर्वक निभा रही हैं। उनका सार्वजनिक जीवन समावेशी विकास की भावना से अनुप्राणित रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं अपेक्षाकृत अविकसित क्षेत्रों, युवाओं, महिलाओं तथा समाज के वंचित वर्गों के विकास एवं सशक्तीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उल्लेखनीय रही है।विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, धर्मार्थ संस्थाओं एवं गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से ‘बालिकाओं एवं महिलाओं की शिक्षा, प्रशिक्षण, आर्थिक सशक्तीकरण तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य एवं कल्याण’ के लिए उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनकी दृष्टि उन्हें एक संवेदनशील जनप्रतिनिधि एवं प्रेरक नारी शक्ति के रूप में विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। उन्हें यह पुरस्कार अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन नाहटा व राष्ट्रीय महामंत्री रचना हिरण तथा अन्य पदाधिकारियों ने प्रदान किया। 

महिलाओं के योगदान के बिना समाज का विकास संभव नहीं —

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि जैन समाज हमेशा अहिंसा, सेवा, संस्कार, संयम, करूणा और मानवता का पक्षधर रहा है। जैन समाज सबको साथ लेकर आगे बढते हुए सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए हमेशा अपना योगदान देता आया है। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए महिला शक्ति को साथ लिए बिना विकास की कल्पना अधूरी है। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के मार्गदर्शन में समाज की महिलाएं अपनी परम्पराओं और पहचान को निभाते हुए नव पीढ़ी को संस्कारवान बना रही है, वहीं शिक्षा, व्यवसाय, सामाजिक सेवा, खेल, प्रशासन सहित जीवन के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और नेतृत्व का परिचय दे रही है, जो प्रशंसनीय है।

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