
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय (एचजेयू) में मंगलवार को ‘विभाजन की विभीषिका और सिंधी साहित्य’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिंधी अकादमी, राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भगवान अटलानी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने की। कार्यक्रम की संयोजक एचजेयू की समन्वयक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक डॉ. गरिमा श्री रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत में कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने मुख्य वक्ता डॉ. भगवान अटलानी का श्रीफल और शॉल भेंटकर सम्मान किया। अपने संबोधन में कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय समय-समय पर ज्वलंत और समसामयिक विषयों पर विशेष व्याख्यान आयोजित करता रहा है। इसी क्रम में ‘विभाजन की विभीषिका और सिंधी साहित्य’ विषय पर आयोजित यह व्याख्यान इस सत्र का पहला आयोजन है।
मुख्य वक्ता डॉ. भगवान अटलानी ने कहा कि भारत का विभाजन बेहद पीड़ादायक था और सिंधी साहित्य आज भी यह त्रासदी झेल रहा है। विभाजन के समय 10 लाख से अधिक हिंदू सिंधी आबादी को पलायन कर भारत आना पड़ा। उन्होंने बताया कि उस समय यह चर्चा भी हुई थी कि गांधीधाम क्षेत्र सिंधी भाषियों को देकर उसे ‘सिंध प्रदेश’ का नाम दिया जाए, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ‘सिंध’ शब्द भले ही भारत के राष्ट्रगान में शामिल है, लेकिन भारत में सिंध नाम का कोई प्रदेश नहीं है। उन्होंने सिंधी भाषा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में सिंधी भाषा के अध्ययन-अध्यापन की समुचित व्यवस्था नहीं है और इसके मानकीकरण की दिशा में भी अपेक्षित कार्य नहीं हुआ है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष भी उपस्थित थे।