
ब्यूरो चीफ रविसिंह / परिष्कार पत्रिका
जयपुर। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा प्रभु निधि सभागार, वैशाली नगर जयपुर में सेल्फ एम्पावरमेंट टू वुमन एम्पावरमेंट विषय पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित वक्ताओं ने नारी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर अपने विचार व्यक्तकिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं राजयोगिनी सुषमा दीदी, जयपुर सबजोन प्रभारी, ब्रह्माकुमारीज़ ने कहा, नारी दुर्गा का स्वरूप है। हमें अपने सच्चे स्वरूप को इमर्ज करना होगा। हम ऊँची संस्कृति की विरासत हैं, इसलिए हमें अपनी वृत्तियों का सकारात्मक परिवर्तन करने की आवश्यकता है।
डॉ शिखा मिल विधायक, चोमू ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा नारी केवल घर की ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की धुरी है। राजनीति से लेकर प्रशासन तकए महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। आज नारी अबला नहीं, सबला है। सरकार भी महिलाओं के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है, लेकिन असली सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाएं खुद अपनी शक्तिको पहचानें और आत्मनिर्भर बनें।
भारत की पहली एमबीए सरपंच छवि राजावत ने कहा, हमें खुद पर गर्व होना चाहिए। हमें न केवल अपनी उन्नति पर ध्यान देना है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को भी साथ लेकर चलना है। गलत रास्ते पर जा रहे लोगों को सही दिशा दिखाना भी हमारी जिम्मेदारी है। यह मार्गदर्शन केवल आध्यात्मिकता से ही संभव है। उन्होंने महिलाओं से एकजुट होकर समाज, पर्यावरण और देश के लिए कार्य करने की अपील की।
शैलजा देवल निदेशक ने कहा महिला होना अपने आप में सौभाग्य की बात है। मैंने जंगली जानवरों के बीच काम किया, कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन कभी खुद को कमजोर महसूस नहीं किया। महिलाएं यदि ठान लें, तो वे हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। डॉ सुदीप्ति अरोड़ा चेयरपर्सन वूमेन विंग एसोचाम ने खुशी और सकारात्मक ऊर्जा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को अपने भीतर आनंद खोजना होगा। ताली बजाने से हमारा ब्रेन एक्टिवेट होता है, लेकिन असली खुशी भीतर से आती है। जब एक महिला खुश रहती है, तो पूरा वातावरण सकारात्मक बनता है। उन्होंने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका पर भी बल दिया। डॉ सोनिया टुटेजा ट्रस्टी केमिकल फ्री फाउंडेशन एवं डायरेक्टरए तत्त्व वेलनेस स्टूडियो ने महिलाओं को केमिकल युक्तउत्पादों से बचने और प्राकृतिक उपचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सौंदर्य बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होता है और महिलाओं को इसके प्रति जागरूक रहना चाहिए। बी एस राजबाला एग्रो एंटरप्रेन्योर ऑर्गनिक ने जैविक खेती और महिला उद्यमिता पर अपने विचार साझा किए और बताया कि किस प्रकार महिलाएं इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। शिप्रा शर्मा फाउंडर, स्टार्टअप कैपेसिटा कनेक्ट ने शिक्षा को सबसे बड़ी शक्तिबताते हुए कहा कि हम अबला नारी को सबला नारी बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। हम महिलाओं, विकलांगों और गरीब वर्ग को प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर राजयोगिनी चंद्रकला दीदी ने कहा नारी का कोई अरी दुश्मन नहीं होता। उसे प्यार की डिमांड नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी कमांडिंग पर्सनैलिटी विकसित करनी चाहिए। नारी केवल शक्तिनहीं, बल्कि सृष्टि की रचयिता है। उसे अपने दिव्य स्वरूप को पहचानकर समाज को नई दिशा देनी होगी। एडवोकेट अंबिका देसाई ने महिलाओं को कानून के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता पर बल दिया और कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े बच्चों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं कुमारी देव कृति ने जीते हैं चल गीत पर मनमोहक नृत्य किया।