राजस्थान दिवस समारोह : कृष्णायन सभागार में प्रातःकालीन संगीत सभा में पंडित आनंद वैद्य की गायन प्रस्तुति

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ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार / परिष्कार पत्रिका जयपुर। राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत आज दीनांक 19 मार्च को आठ बजे से केंद्र के कृष्णायन सभागार में प्रातःकालीन संगीत सभा में पंडित आनंद वैद्य ने अपनी गायन प्रस्तुति दी। प्रात:कालीन रागों में उन्होंने राग भैरव में विलंबित एकताल एवं मध्यलय तीनताल की दो रचनाएं प्रस्तुत की उसके बाद राग बिलासखानी तोड़ी में रूपक में विलंबित और मध्यलय तीनताल की रचना प्रस्तुत की उसके बाद राग बसंत में मध्यलय तीन ताल और द्रुत एकताल में रचना प्रस्तुत की तत्पश्चात परमानंद दास जी का एक भजन “माई मेरो हरी नागर सो नेह”और अंत में भगवान शिव पर आधारित एक भजन “शिव के मन शरण हो” प्रस्तुत किया. पंडित आनंद वैद्य के गाने में राग की शुद्धता,शांत आलापचारी के साथ जबरदस्त तान एवं लयकारी का मिश्रण देखने को मिला और श्रोता अंत तक स्वरों के रस में डूबते रहे तबले पर श्री मनप्रीत सिंह और हारमोनियम पर राहुल नायक ने सधी हुई संगत की। गायन सहयोग तन्वी वैद्य, मुस्कान कोटवानी और हर्ष लखेरा ने किया।

राजस्थान दिवस समारोह का भव्य समापन: रेतीला बैण्ड ने बाँधा समा –

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार / परिष्कार पत्रिका जयपुर। राजस्थान दिवस समारोह के समापन दिवस पर जवाहर कला केंद्र के मध्यवर्ती सभागार में सायं 7 बजे आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध ‘रेतीला बैण्ड’ की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक-संगीत, सूफियाना रंग और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के अद्भुत समन्वय ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘सुर बहारा – पणीहारी’ से हुई, जिसने मरुधरा की लोक-परंपराओं की मधुर झलक प्रस्तुत की। इसके बाद ‘लोली’ और ‘आवो नी पधारो म्हारे देश’ जैसी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं का उत्साह बढ़ाया। ‘मेहमान’ और ‘कोढ करें म्हारी मां मीरा ने सांवरियो परणाय’ में भक्ति और लोकभाव का सुंदर समागम देखने को मिला।

वाद्य प्रस्तुतियों में ‘जलालो बिलालो – मोरचंग’ और ‘तालरिया मगरिया – भपंग’ ने पारंपरिक ध्वनियों का अनूठा अनुभव कराया, वहीं ‘चीरमी – घूमर ढोल बीट’ और ‘चुड़ी चमके’ पर दर्शक झूम उठे। ‘सारंगी सोलो सोरठ’ में राजस्थानी संगीत की गहराई का सजीव प्रदर्शन हुआ।

कार्यक्रम के मध्य भाग में ‘बाईसा रा बीरा + कद आओ’, ‘घूमर + सूदर गोरी + चौधरी’ और ‘चरखों’ जैसी प्रस्तुतियों ने लोकनृत्य और संगीत की रंगत को और भी गहरा किया। ‘झिरमिर बरसे’ तथा ‘खड़ताल ओडियश के साथ’ में ताल और लय का अद्भुत संगम देखने को मिला।

अंतिम चरण में ‘मिजाज प्यारो लागे’, ‘बिछड़ों’, ‘माला रो मणियों’, ‘कानुडो नी जाणे’ और ‘रंगी रंगी बनाया’ जैसी प्रस्तुतियों ने माहौल को भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना दिया। समापन ‘माइये तेरे चरखे नु + छाप तिलक’ तथा ‘रुण झुण बाजे + हेलो + धरती धोरा री’ जैसे लोकप्रिय गीतों के साथ हुआ, जिस पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

रेतीला बैण्ड के कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से कार्यक्रम को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। बैण्ड के सदस्य रहे—
गोविंद सिंह (संयोजन व गायक), बुन्दु खान (गायन), इखलास खान (सारंगी व गायन), शकुर खान (अलगोजा, मोरचंग, खड़ताल), असलम खान (गायन), विनोद राणा (तबला), रसूल खान (ढोलक), महेश कुमार (इलेक्ट्रिक परकशन), विकास राव (गिटार) तथा विश्वेंद्र सिंह (बैण्ड मैनेजर)।

इस अवसर पर उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए राजस्थान की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए इस तरह के आयोजनों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। समारोह का यह समापन कार्यक्रम रंग, संगीत और संस्कृति के संगम के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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