राजस्थान में जनधन खाताधारकों की मृत्यु पर उनके उत्तराधिकारियों की बैंकों के चक्कर लगाते घीस रही है जूतियां, फिर भी नहीं मिल रही बैंकों में जमा राशि : चंदालाल बैरवा एडवोकेट

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ब्यूरो चीफ रवि सिंह / परिष्कार पत्रिका
जयपुर। धरातल की सच्चाई – जनधन योजना वित्तीय सशक्तिकरण क्रान्ति के लिए एतिहासिक पहल, लेकिन क्रियान्वयन में खोट, मृतक खाता धारकों की जमा राशि मिलने में हो रही है परेशानी: चन्दा लाल बैरवा
जनधन योजना के खाते सफलतापूर्वक 28 अगस्त 2024 को एक दशक पूरे होने पर प्रधानमंत्री को हार्दिक बधाई व शुभकामनाऐं। जनधन योजना यपीएमजेडीवाई प्रधानमंत्री द्वारा संचालित एक वित्तीय सशक्तिकरण के लिए एतिहासिक योजना थी, जिसको 28 अगस्त, 2024 को, पूरे दस वर्ष हो गये। दस वर्षो में पूरे देश में लगभग 53 करोड से अधिक जनधन खाते बैंको में खोले जा चुके है। इसका परिणाम यह रहा कि 80 प्रतिशत वयस्कों का किसी न किसी बैंक में खाता है। प्रधानमंत्री की मंशा व सोच प्रगतिशील है ताकि ग्रामीण लोगों के पैसे सुरक्षित रहे, सरकारी की विभिन्न प्रकार की योजनाओं का लाभ सीधा लाभार्थीयों के खाते में स्थानान्तरण हो सके इसलिए प्रधानमंत्री ने एक विशेष अभियान चला कर 28 अगस्त 2014 में जनधन खाते पूरे देश में खोलने का एक विशेष अभियान चलाया गया। यह अभियान राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश में चला। ग्रामवासियों को छोटी पूंजी को रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नही थी, किसी को उधार देने पर थोडे सी ब्याज के लालच में, मूल राशि ही डूब जाती थीए जिससे मूल राशि भी सुरक्षित नही रहती थी तथा ब्याज भी नही मिलता था। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पोस्ट ऑफिस द्वारा नगद राशि मिलने पर लाभार्थी को योजना की पूरी राशि नही मिलती थी, बीच में बिचोलिया खा जाते थे। चाहे वो मनरेगा की राशि हो, विधवा पेंशन योजना, वृद्वा पेंशन योजना, विशेष योग्यजन पेंशन योजना, अतिवृष्टि, अनावृष्टि की मिलने वाली आर्थिक सहायता, आदि किसान सम्मान निधि योजना आदि का लाभ पूरा लाभार्थीयों को नही मिलता था लाभार्थीयों के बीच में छृट्ट भैया दलाल, राजनेता, सेवा शुल्क के नाम पर कुछ प्रतिशत राशि हजम कर जाते थे। इसका सीधा लाभ लाभार्थी को मिले इसके लिए जनधन खाता खोलने व सभी योजनाओं का लाभ सीधा लाभार्थी के खाते में स्थान्तरण करने की एक क्रान्तिकारी पहल थी। जनधन खातो का सीधा-सीधा लाभ 65 प्रतिशत से अधिक खाते ग्रामीण या अर्धशहरी क्षेत्रों में है। करीब 39 लाख करोड रूपये का प्रत्यक्ष हस्तांतरण हुआ है। लगभग 30 करोड महिलाओं को बैकिंग प्रणाली से जोडा गया, यह एक सराहनीय प्रयास था, लेकिन जनधन खाता अभियान के एक दशक पूरा होने पर भी जनधन खाता धारकों को कई समस्याओं का सामना करना पड रहा है, जिसके कारण से जनधन खाता धारकों को योजना से जुडे लाभ का फायदा नही मिल पा रहा है।
जनधन खाता धारकों को मिलने वाला लाभ
जनधन खाता धारक लाभार्थी की मृत्यु पर 30,000 हजार का जीवन कवर उपलब्ध कराती है, जो 15अगस्त 2014 से 31 जनवरी 202015 के बीच खोले गये है। खाता धारक को बीमा की सुविधा मिलेगी जो नॉमिनी को फायदा मिलता है। जनधन खाता किसी भी बैंक में खुलवा सकते है। 1 लाख का इक्सीडेंट इंश्योरेस और 30 हजार का लाईफ टाइम कवर भी मिलता है। 28 अगस्त 2018 के बाद दुर्घटना बीमा 2 लाख कर दिया गया है।
यह जांच का विषय है कि क्या उक्तलाभ खाता धारकों को मिल रहा है या नही सवाल खडा होता है, जनधन खाता के उक्तलाभों का प्रचार प्रसार के अभाव से खाता धारक को इनका लाभ नही मिल रहा है। बैंक प्रबन्धकों द्वारा जनधन खाता योजना के लाभ बताया नही जाता है। बात यही समाप्त नहीं होती खाता धारकों की चिन्ता जब ज्यादा बढ जाती है जब खाता धारक की मृत्यु हो जाने पर खाता धारक का नॉमिनी/ उत्तराधिकारी जब बैंक में जाता है तो उसको बैंक प्रबन्धक यह कह कर टरका देता है कि आपका नाम खाते में नॉमिनी में नही है, जबकि बैंक प्रबन्धक की जिम्मेदारी व जवाबदेही होनी चाहिये कि आवेदन करते समय नॉमिनी का नाम आवेदन पत्र में लिखे, बिना नॉमिनी के खाते में लेन-देन ही नहीं होना चाहिये ना ही बिना नॉमिनी के खाता खोलना ही नही चाहिये था। कई खाताधारकों ने आवदेन के समय नॉमिनी का नाम लिखा लेकिन बैंक से रिकोर्ड नहीं मिलने के कारण से खाता धारक की बैंक में जमा पूंजी प्राप्त करने के लिए नॉमिनी की जूतिया घीस जाती है, लेकिन खाताधारक के उत्तराधिकारी को जमा राशि नही मिलती और हार थक कर नॉमिनी बैंक में जाना बन्द कर देता है। यदि कोई पढा लिख व्यक्तियह पता लगाने का प्रयास करता है कि नॉमिनी उत्तराधिकारी का नाम बैंक के रिकोर्ड में या कम्प्यूटर में क्यों नही है तो बैंक शाखा प्रबन्धक कहते है कि लाखो की संख्या में बैंक में खाते खोले गये थे, फार्म पता नही कहा गुम हो गया, मिल नही रहा व बैंक प्रबन्धक ने उस समय आवेदक के फार्म को कम्प्यूटर में अपलोड नही किया जिसके कारण से ना तो फार्म मिल रहा ना ही सॉफ्ट कापी खाता में अपलोड की गई है, जिसका खामियाजा बैंक धारक के नॉमिनी/ उत्तराधिकारी को भुगतना पड रहा है। बैंक वालों का इतना ही कहना होता है और मृतक की जमा पूंजी बैंक डकार जाता है और बैंक में जमा राशि बैंक में ही रह जाती है। मैं प्रधानमंत्री से यह कहना चाहता हूं कि आपने जनधन खाता के एक दशक पूरे होने पर कहा था कि उनकी दुनिया ऐसी थी जहां बचत घर पर रखी जाती थी, जिसके खोने तथा चोरी होने का खतरा बना रहता था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि कर्ज तक पहुंच साहूकारों की दया पर निर्भर थी। वित्तीय सुरक्षा के अभाव में कई सपने पूरी नहीं हो पाते थे।
मैं प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुये कहना चाहता हूॅ कि देश के गरीब गुरर्बा लोग पहले साहूकारों की दया पर निर्भर थे, अब खाता धारक की मृत्यु हो जाने पर पैसे लेने के लिए नॉमिनी, बैंक प्रबन्धक पर निर्भर होता नजर आता है। साहूकार को दया आ जाती थी, लेकिन बेंक प्रबन्धक कानून कायदों व दस्तावेजो का हवाला देकर नॉमिनी को बैंक से टरका देता है उसकी कोई सुनने वाला नही है। यह एक व्यक्ति की पीडा नहीं है जनधन खाता धारक जो काल के गाल के समा गये सभी मृतकों के लाखो नॉमिनी/ उत्तराधिकारी के करोडो रूपये बेंको में जमा है, लेकिन जनधन खाता संचालक, प्रबन्धक, किसी का इस समस्या पर एक दशक बाद भी ध्यान नही गया।
जनधन खाता धारकों के खोले गये खातों की निम्न बिन्दूओं पर राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा करने के लिए जाने माने अर्थशास्त्री की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जावे तथा निम्न बिन्दूओं पर समीक्ष करे। जनधन योजना के तहत एक दशक में कितने खाता खोले गये। कितने खाता धारक की मृत्यु हो गई। कितने खाता धारकों के खाते में नॉमिनी उत्तराधिकारी का नाम दर्ज था। कितने खाता धारकों की मृत्यु पर कितने नॉमिनी/ उत्तराधिकारी को जमा राशि दी गई। कितने खाता धारकों की मृत्यु पर कितने नॉमिनी/ उत्तराधिकारी को जमा राशि नही दी गई तथा किसी कारण से नही दी गई। एक दशक में कितने खाता धारकों की कितनी जमा रिश बैंक में जमा है। राज्यवार। जमा राशि का मुख्य कारण क्या है। जमा राशि नॉमिनी/ उत्तराधिकारी को बैंक प्रबन्धक द्वारा नही दी गई। इसके लिए शाखा प्रबन्धक कौन जिम्मेदार है। नॉमिनी/ उत्तराधिकारी की जमा राशि नही दी गई इसके लिए बैंक प्रशासन द्वारा एक दशक में क्या रणनीति तैयार की गई इस पर एक समीक्षा होनी चाहिये तथा इसका क्रियान्वयन होना चाहिये तभी आपका कहना सार्थक साबित होगा कि साहूकारों की दया पर निर्भर थी, वित्तीय सुरक्षा के अभाव में कई सपने पूरे नही हो पाते थे। आशा है मोदी इस पर जरूर गौर कर प्रभावित लाभार्थीयों को उनका हक जमा राशि को नॉमिनी/ उत्तराधिकारी को दिलवाने के लिए ठोस दिशा निर्देश जारी करेगे। राज्यवार जनधन खातों की समीक्षा करवायेगे तो सामने आयेगा कि लाखों खाता धारकों के करोडो रूपये उनके नॉमिनी/ उत्तराधिकारी को नही मिले है, जो की उनका अधिकार है।

चंदालाल बैरवा, एडवोकेट, ग्राम चकवाडा, तह. फागी, जिला जयपुर राज.

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