
ओउमाश्रय सेवा धाम में मोक्षकारी यज्ञ और महाकुंभ पर चिंतन।
ब्यूरो चीफ रवि सिंह / परिष्कार पत्रिका जयपुर। समस्त जीवों के कल्याणार्थ अर्द्ध कुंभ, कुंभ और महाकुंभ क्षेत्रीय राष्ट्रीय और वैश्विक त्रिविध तापों दुखों से बचाने हेतु तपस्वी संत विद्वान मनीषीओं का एकत्रित हो चिंतन का यज्ञीय पर्व है महाकुम्भ। उक्त कथन वैदिक चिंतक ओउमाश्रय सेवा धाम संस्थापक यशपाल यश ने मोक्षकारी यज्ञ और महाकुंभ पर सनातन वैदिक चिंतन व्यक्त करते हुए प़कट किया। यश ने कहा कि ऋज् धातु से बने यज्ञ शव्द के तीन अर्थ होते हैं दान संगतिकरण और देव पूजा जो महाकुंभ की आत्मा है। महाकुंभ देव पूजा के लिए संगतिकरण है संसार के सभी विचारकों का पांच जडदेवों अग्नि वायु पृथ्वी जल और आकाश की पूजा यानी इनकी पवित्रता वनाए रखने हेतु अग्निहोत्र आदि कार्यो को करने का संकल्प पत्र तैयार करना।यश ने कहा कि यह पर्व भीड़ इकट्ठी कर जल वायु आदि को दूषित करना अफरातफरी मचबाने का नहीं बरन् जल के समीप नैसर्गिक तपोमय वातावरण में वसुधैव कुटुम्वकम् की भावना से भौतिक, आदिभौतिक और आध्यात्मिक दुखों से निजात दिलाने का यज्ञीय पर्व है। यश ने कहा कि असत्य ज्ञान फैला कर मोक्ष का पासपोर्ट दिलाने की बातें कर आम जन को संकट त्रासदी में डालना अधर्म पाप ही नहीं अपराध भी है। यश ने मोक्ष का साधन विवेक वैराग्य षठ सम्पत्ति और मुमुच्छा है जो यज्ञ योग द्वारा सहज संभव है। ओउमाश्रय संचालक देवेश गोयल ने बताया कि यज्ञ में मुख्य यजमान यशवंत कुमार शर्मा रेखा शर्मा, ओउमप़काश गुप्ता एवं विमलेश, राजेश अग्रवाल एवं डॉ संगीता गुप्ता रामस्वरूप गुप्ता श्याम सुन्दर गुप्ता प़ेम देवी दक्षिका दक्ष आदि अनेक गणमान्य मौजूद रहे।