मानसून से पूर्व जर्जर विद्यालय भवनों के कायाकल्प की व्यापक पहल – दो हजार से अधिक विद्यालय भवनों की वृहद मरम्मत

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21 हजार स्कूलों में हुई वाटरप्रूफिंग – अगले एक वर्ष में प्रदेश को मिलेंगे 175 नवीन विद्यालय भवन

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षा विभाग विद्यालयों की आधारभूत स्थिति सुधारने में जुटा हुआ है। गत वर्ष मानसून के दौरान झालावाड़ के पीपलोदी में विद्यालय भवन गिरने की दुर्घटना के बाद प्रदेश में जर्जर भवनों में चल रहे राजकीय विद्यालयों को चिह्नित करने का काम युद्धस्तर पर किया गया। शिक्षा विभाग की ओर से चिह्नित दो हजार से अधिक विद्यालय भवनों में मरम्मत के कार्य लगातार जारी हैं और मार्च माह तक सभी भवन नई मजबूती के साथ तैयार हो जाएंगे। साथ ही एसडीआरएफ की ओर से प्रदेश के 21 हजार विद्यालयों में करवाए गए वाटरप्रूफिंग व मरम्मत के कार्य भी पूर्ण हो चुके हैं। इससे आगामी मानसून के दौरान बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर पाएंगे। गत बजट घोषणा के अनुरूप 175 नए विद्यालय भवन भी निर्माणाधीन हैं जो एक वर्ष में बनकर तैयार हो जाएंगे। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की सिविल शाखा के अनुसार प्रदेश के सभी विद्यालयों में बालिका शौचालय, 900 विद्यालयों में 2250 से अधिक साइंस लैब, 229 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में डायनिंग कम स्टडी हॉल, सात जिलों के डाइट सेंटर्स में हॉस्टल सहित अन्य निर्माण कार्य व 3000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों की मरम्मत के कार्य प्रक्रियाधीन हैं।

पीपलोदी में पहले से बड़ी जमीन पर बन रहा विद्यालय:

पीपलोदी में हुई दुर्घटना के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्यवाही करते हुए विद्यालय की जर्जर इमारत को ध्वस्त कर विद्यालय के नवनिर्माण की शुरूआत कर दी थी। ग्रामवासियों की मांग पर विद्यालय भवन के लिए दूसरी जमीन चिह्नित की गई जो आकार में पुरानी जमीन से काफी बड़ी है। यहां भवन निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और जल्द ही विद्यालय नए भवन में संचालित होगा।

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