Interview – Parishkarpatrika https://parishkarpatrika.com News Website Fri, 06 Feb 2026 03:51:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://parishkarpatrika.com/wp-content/uploads/2023/12/cropped-site-icon-32x32.png Interview – Parishkarpatrika https://parishkarpatrika.com 32 32 केंन्द्रीय बजट 2026-27 के विकसित भारत दृष्टिकोण में दलित आदिवासी समुदाय के लिए बजट जनंसख्या के अनुपात में आवंटित नही करना चिन्ताजनक https://parishkarpatrika.com/in-the-developed-india-vision-of-union-budget-2026-27-it-is-worrying-that-the-budget-for-the-dalit-tribal-community-is-not-allocated-in-proportion-to-the-population/ https://parishkarpatrika.com/in-the-developed-india-vision-of-union-budget-2026-27-it-is-worrying-that-the-budget-for-the-dalit-tribal-community-is-not-allocated-in-proportion-to-the-population/#respond Fri, 06 Feb 2026 03:47:26 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=4389


पीपुल्स एक्षन फॉर रूरल अवेकनिंग (पारा), राजस्थान व दलित अधिकार केन्द्र जयपुर द्वारा जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। वर्ष 2026 वास्तव में भारत के लिए आर्थिक विस्तार और विकास के लिहाज़ से एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष है , चाहे वह क्षेत्रीय स्तर पर हो या वैश्विक स्तर पर, जहाँ भारत का योगदान लगातार बढ़ रहा है और भू-राजनीतिक परिदृश्य में उसकी स्थिति स्पष्ट रूप से मज़बूत होती जा रही है। भारत ने आधिकारिक रूप से BRICS की अध्यक्षता संभाल ली है और आगामी 18 वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है, जिसका फोकस लचीलापन और नवाचार पर आधारित है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भी किया है] जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आने और रोज़गार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। इसी पृष्ठभूमि में वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया गया, जिसमें आम लोगों और समुदायों के लिए बहुत कम प्रावधान दिखाई देते हैं, जबकि ज़ोर मुख्य रूप से अवसंरचना विकास पर दिया गया है। यह FTA देश के लिए आर्थिक उछाल का वादा करता है, जो लगभग 20 लाख लोगों और भारत तथा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के GDP को प्रभावित करेगा, और इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में देखा जा रहा है।
दलितों और आदिवासियों के लिए यह सुनिश्चित करने हेतु कि विकास की प्रक्रिया उनके लिए भी जारी रहे, कोई ठोस या नई पहल दिखाई नहीं देती। वित्त वर्ष 2026&2027 के लिए कुल केंद्रीय बजट 5]831]099 करोड़ रुपये का है। इसमें दलितों के लिए 1]96]400 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और आदिवासियों के लिए 1]41]088]6 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यद्यपि यह आवंटन जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए] लेकिन आदिवासियों के लिए आवंटन अपेक्षा से अधिक है] जबकि दलितों के लिए 43]207 करोड़ रुपये की कमी रह गई है। गहन विश्लेषण से यह भी स्पष्ट होता है कि अनुसूचित जातियों के लिए केवल लगभग 75]077 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजातियों के लिए लगभग 62]093 करोड़ रुपये ही वास्तव में सीधे लक्षित आबादी तक पहुँचते हैं।
शिक्षा दलितों और आदिवासियों के विकास के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। अनुसूचित जातियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के अंतर्गत 6]360 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है] जो पिछले वर्ष के 5]900 करोड़ रुपये से अधिक है] जबकि आदिवासियों के लिए आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है] जो 2]462]68 करोड़ रुपये से बढ़कर 3]176]48 करोड़ रुपये हो गया है। राष्ट्रीय विदेश छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship) के अंतर्गत SC के लिए इस वर्ष 125 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष 130 करोड़ रुपये था] जबकि ST के लिए यह 2025&26 में 0-01 लाख रुपये से बढ़कर इस वर्ष 20-00 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार, प्री-मैट्रिक योजना के अंतर्गत आवंटन SC के लिए 577-96 करोड़ रुपये पर स्थिर बना हुआ है, जबकि ST के लिए यह पिछले वित्त वर्ष के 313-79 करोड़ रुपये से बढ़कर 339-05 करोड़ रुपये हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 से जुड़ा हालिया मुद्दा भविष्य की बहस का विषय है, और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि समानता सुनिश्चित करने के लिए की गई एक छोटी-सी सतर्क पहल भी समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग को विचलित, असहज और परेशान कर देती है। माँग स्पष्ट है कि UGC के दिशानिर्देशों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए और उनके लिए पर्याप्त बजट आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
दलितों और आदिवासियों के विरुद्ध अत्याचारों की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। नवीनतम NCRB रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में लगभग 57]000 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बावजूद, PCR और PoA अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए कुल आवंटन केवल लगभग 550 करोड़ रुपये है] जिसमें से मात्र 165 करोड़ रुपये विशेष रूप से महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने के लिए आवंटित किए गए हैं। मैनुअल स्कैवेंजिंग से संबंधित सभी योजनाओं को हटा दिया गया है, केवल NAMASTE योजना को छोड़कर] जो मुख्य रूप से यंत्रीकरण पर केंद्रित है] न कि मैनुअल स्कैवेंजिंग में लगे महिलाओं और पुरुषों की रोकथाम और पुनर्वास पर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए बजट में 11]911 करोड़ रुपये से बढ़कर 13]644 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह एक स्वागत योग्य कदम है] क्योंकि यह एक लक्षित योजना है और इसमें आय सृजन तथा कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं।
केंद्रीय बजट 2026&27 में एक और महत्वपूर्ण बदलाव VB-RAM-G योजना की शुरुआत है, जो MGNREGA योजना का स्थान लेगी। इससे राज्यों पर योगदान के हिस्से का बोझ बढ़ेगा] जबकि समस्त शक्ति का स्थानांतरण केंद्र की ओर होगा] जिससे राज्य और स्थानीय शासन कमजोर होंगे। क्या MGNREGA के तहत पहले से मौजूद खामियाँ और समस्याएँ] जैसे मज़दूरी का भुगतान न होना और गरीबों के साथ होने वाला भेदभाव] अब और अधिक दबा दी जाएँगी। क्या VB-RAM-G योजना के तहत आवाज़हीन लोगों को न्याय मिल पाएगाA
कुछ सिफ़ारिशें निम्नलिखित हैं:
1- केंद्रीय क़ानून:
1- केंद्रीय SCP एवं TSP क़ानून लागू किया जाए: सरकार को SCP एवं TSP बजट के लिए एक केंद्रीय क़ानून बनाना चाहिए] ताकि विकास की खाइयों को कानूनी रूप से पाटा जा सके।
2- पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए: क़ानून में पारदर्शिता और जवाबदेही के कड़े विधायी सिद्धांतों का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए] ताकि वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित हो सके।
B. सार्वजनिक स्वास्थ्य:
1- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि NHM, PMJAY, जन औषधि और PM POSHAN सहित विभिन्न स्वास्थ्य पहलों के अंतर्गत SC और ST के लिए किया गया आवंटन सुरक्षित रहे और उसका दुरुपयोग न हो।
2- ग्रामीण तथा SC/ST क्षेत्रों में जन औषधि केंद्रों की संख्या बढ़ाकर और यह सुनिश्चित करके कि सार्वजनिक अस्पताल जेनेरिक दवाओं के पर्चे की नीतियों का पालन करें, किफायती दवाओं तक पहुँच में सुधार किया जाना चाहिए।
3- सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को GDP के 1-3 izfr’kr से ऊपर बढ़ाया जाना चाहिए, साथ ही SC और ST के स्वास्थ्य संकेतकों के लिए स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम तय किए जाने चाहिए।
4- SC और ST महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ज़ोर दिया जाना चाहिए और मातृत्व, प्रजनन तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए ऐसी लक्षित पहल की जानी चाहिए, जो जाति और लिंग की जटिलताओं को संबोधित कर सके।
शिक्षा:
• सरकार को आधार पेमेंट ब्रिज प्रणाली को मज़बूत करके छात्रवृत्तियों का समय पर वितरण सुनिश्चित करना चाहिए और देरी के लिए जिम्मेदार संस्थाओं को जवाबदेह ठहराना चाहिए।
• यह सिफ़ारिश की जाती है कि पोस्ट-मैट्रिक और राष्ट्रीय विदेश छात्रवृत्ति को ट्यूशन फ़ीस की मुद्रास्फीति दर के अनुरूप बढ़ाया जाए।
• हम प्रधानमंत्री गर्ल्स हॉस्टल योजना पर पुनर्विचार या उसके पुनर्गठन की सशक्त सिफ़ारिश करते हैं, ताकि SC और ST बालिकाओं के शैक्षणिक अवसरों की रक्षा हो सके, क्योंकि सुरक्षित आवास शिक्षा तक समान पहुँच और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
• उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026 को लागू करने के साथ-साथ] UGC को उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।
सामाजिक सुरक्षा:

  • पेंशन] स्वास्थ्य बीमा और खाद्य सब्सिडी जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ तात्कालिक कठिनाइयों को कम कर सकती हैं] लेकिन शिक्षा] कौशल या बेहतर रोज़गार के अवसरों तक पहुँच के बिना सामाजिक उन्नति सुनिश्चित नहीं करतीं। इसलिए SC और ST के लिए सामाजिक सुरक्षा का उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं, बल्कि क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देना होना चाहिए।
  • SC/ST असंगठित श्रमिकों के लिए सरल पंजीकरण प्रणाली, प्रवासी श्रमिकों के लिए पोर्टेबल लाभ] मज़बूत रोज़गार और मज़दूरी समर्थन] विस्तारित स्वास्थ्य बीमा और पेंशन] तथा कौशल प्रशिक्षण और ऋण सहायता के माध्यम से बेहतर आजीविका सुनिश्चित करते हुए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
    आजीविका:
  • आय सृजन और आजीविका से जुड़ी ऋण योजनाएँ और कार्यक्रम तभी प्रभावी और सार्थक हो सकते हैं, जब उनकी मंशा योजना के लाभ प्राप्त करने की निर्धारित शर्तों और नियमों से मेल खाती हो। इसलिए हम ऋण योजनाओं की शर्तों और नियमों की समीक्षा और उनमें बदलाव की सशक्त सिफ़ारिश करते हैं, ताकि वे अधिक सुलभ बन सकें। ऋण वितरण में देरी] अनुरोधों को अस्वीकार करना और बैंकों व वित्तीय संस्थानों द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप के मामलों में जवाबदेही तय की जानी चाहिए तथा इस अन्यायपूर्ण व्यवहार के विरुद्ध समयबद्ध हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
    न्याय तक पहुँच:
  • अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक अलग योजना होनी चाहिए, जिसमें SC और ST के विरुद्ध बढ़ते अत्याचारों से निपटने के लिए कम से कम 1]000 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाए। इस निधि का कुल 50 प्रतिशत SC और ST महिलाओं पर होने वाली अंतरविभागीय हिंसा को संबोधित करने के लिए व्यय किया जाना चाहिए।
  • पीड़ितों के मुआवज़े और पुनर्वास के लिए] पुलिस से जुड़ी पहलों जैसे विशेष पुलिस थाने और विशेष संरक्षण प्रकोष्ठ न्यायिक उपायों में विशेष अदालतों की स्थापना, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति, निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था] तथा जागरूकता निर्माण के लिए PoA अधिनियम और PCR अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अलग-अलग बजट मदें बनाई जानी चाहिए। इससे राज्य सरकारों की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और राज्य तंत्र को विशिष्ट आवश्यकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित करने में मदद मिलेगी।
  • मुआवज़े की राशि में संशोधन आवश्यक है। SC/ST नियमों के 2016 के संशोधन के अनुसार न्यूनतम मुआवज़ा केवल 85]000 रुपये है] जिसमें मतदान से रोकना] चुनाव में नामांकन दाख़िल करने से रोकना, PRI सदस्यों को कार्य करने से डराना] सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार तथा झूठी शिकायतें दर्ज कराना जैसे अत्याचार शामिल हैं। अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत न्यूनतम मुआवज़ा राशि को बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए। अन्य अत्याचारों के लिए भी उनकी गंभीरता के आधार पर मुआवज़े की राशि में संशोधन किया जाना चाहिए।
  • विशेष रूप से हत्या और बलात्कार से पीड़ितों के मामलों में मुआवज़े की राशि को 8 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
    स्वच्छता और फ्रंटलाइन कर्मी:
  • हम NAMASTE योजना में पुनः मानवाधिकार आधारित दृष्टिकोण को बहाल करने की सशक्त सिफ़ारिश करते हैं, जैसा कि पहले SRMS योजना में था। महिला स्वच्छता कर्मियों, विशेषकर कचरा बीनने वाली महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा और स्वास्थ्य बीमा की अत्यंत आवश्यकता है, क्योंकि ठेला खींचने जैसे अत्यधिक श्रमसाध्य कार्य उनके प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत कवरेज होने के बावजूद, उन्हें व्यवस्थागत देरी और उपचार से वंचित किए जाने का सामना करना पड़ता है। इसलिए महिला स्वच्छता कर्मियों के लिए आयुष्मान भारत से अतिरिक्त लाभों के साथ एक समर्पित चिकित्सा बीमा घटक अत्यंत आवश्यक है।
  • स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) ग्रामीण के अंतर्गत श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा के लिए 20% निधि आवंटन को अनिवार्य किया जाए। हम कम से कम 8]000 करोड़ रुपये (कल्याण) और 6]000 करोड़ रुपये (सुरक्षा) की सिफ़ारिश करते हैं, ताकि SUY योजनाओं के अंतर्गत स्वच्छता कार्य के अलावा अन्य आजीविका अवसरों का विस्तार किया जा सके और SC समुदाय को विभिन्न रूपों में पुनः स्वच्छता कार्य में धकेले जाने से रोका जा सके। इस व्यवस्थागत दबाव को तोड़ा जाए और स्वच्छता कार्य के दायरे से बाहर कार्य के अवसरों के लिए सहायता प्रदान की जाए।
    लिंग बजट:
  • SC और ST बजट के अंतर्गत एक विशेष SC-ST महिला घटक (DWC) बनाकर कुल बजट का 50% SC और ST महिलाओं के मुद्दों के लिए आवंटित किया जाना चाहिए।
  • हम स्वच्छता] सार्वजनिक स्वास्थ्य और आंगनवाड़ी तथा प्रारंभिक बाल देखभाल केंद्रों जैसी सामुदायिक संस्थाओं में अधिक फ्रंटलाइन कर्मियों की नियुक्ति कर मज़दूरी बढ़ाने और प्रशासनिक बोझ कम करने के लिए आवंटन बढ़ाने की सिफ़ारिश करते हैं। कम से कम 5]000 करोड़ रुपये मज़दूरी वृद्धि] स्वास्थ्य सहायता और कार्य-संबंधी सुरक्षा के लिए निर्धारित किए जाने चाहिए, विशेषकर उन फ्रंटलाइन कर्मियों के लिए जो खतरनाक और अत्यधिक थकाऊ परिस्थितियों में कार्य करते हैं। स्वच्छता, ASHA, केयर, घरेलू कार्य] ANM, आंगनवाड़ी] प्रवासी और संविदा श्रमिकों सहित सभी महिला-प्रधान कार्यबलों के लिए गरिमापूर्ण और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियाँ] उचित मज़दूरी और पर्याप्त सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
    दिव्यांग व्यक्ति:
    • दिव्यांग कल्याण योजनाओं के बजट में कम से कम 40% की पर्याप्त वृद्धि की जानी चाहिए, साथ ही शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक सुरक्षा में जाति और दिव्यांगता आधारित बहुस्तरीय बहिष्करण को संबोधित करने के लिए स्पष्ट रूप से चिन्हित SC/ST उप-आवंटन किया जाना चाहिए।
    • अंतरविभागीय दिव्यांग समावेशन के लिए 300 करोड़ रुपये की एक समर्पित बजट मद आवंटित की जानी चाहिए, जो विशेष रूप से SC/ST दिव्यांग व्यक्तियों को लक्षित करे। यह आवंटन समुदाय-आधारित पहुँच कार्यक्रमों] SC बस्तियों और ST आवासों में अंतिम छोर तक UDID पंजीकरण, फ्रंटलाइन सेवा प्रदाताओं के प्रशिक्षण तथा ज़िला स्तर पर सुलभता और समावेशन समितियों की स्थापना में सहायक होगा।
    • SC/ST बहुल क्षेत्रों में सुलभ शिक्षा और कौशल अवसंरचना के लिए 150 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाना चाहिए, जिसमें सहायक तकनीकें, बाधा-मुक्त परिसर, छात्रावास और SC तथा ST दिव्यांग व्यक्तियों के लिए छात्रवृत्तियाँ शामिल हों।
    युवा रोज़गार:
    • युवा रोज़गार और कौशल विकास योजनाओं के अंतर्गत SC/ST घटकों के लिए आवंटन में कम से कम 50% की वृद्धि की जानी चाहिए, साथ ही अल्पकालिक या असंगठित नियुक्तियों के बजाय नियमित वेतनयुक्त रोज़गार में संक्रमण के लिए अनिवार्य निधि निर्धारण किया जाना चाहिए। इस वृद्धि में शहरी असंगठित क्षेत्रों जैसे निर्माण, स्वच्छता, लॉजिस्टिक्स और गिग कार्यों में कार्यरत SC/ST युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
    • 500 करोड़ रुपये के प्रारंभिक आवंटन के साथ एक समर्पित “SC/ST युवा रोज़गार सुरक्षा कोष” की स्थापना की जानी चाहिए। यह कोष पहली बार कार्यरत SC/ST युवाओं के लिए मज़दूरी सब्सिडी] शहरी रोज़गार गारंटी के पायलट कार्यक्रमों के विस्तार तथा सुरक्षित और भेदभाव-मुक्त रोज़गार प्रदान करने वाले नियोक्ताओं के लिए नियुक्ति-आधारित प्रोत्साहन को समर्थन देगा।
    बच्चे:
  • SC/ST बच्चों को लक्षित बाल श्रम रोकथाम पहलों के लिए बजट में 50% की उल्लेखनीय वृद्धि की जाए। यह बढ़ा हुआ वित्तपोषण उन्नत शैक्षिक सहायता कार्यक्रमों, आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों के विस्तार, परिवारों के लिए वैकल्पिक आय-सृजन अवसरों तथा बाल श्रम की रोकथाम के लिए निरंतर सामुदायिक सहभागिता को समर्थन देगा।
  • SC/ST बच्चों पर विशेष रूप से केंद्रित 250 करोड़ रुपये के प्रारंभिक आवंटन के साथ एक “बाल अधिकार निगरानी कोष” की स्थापना की जाए। यह कोष जाति-आधारित विभाजित आँकड़ों के संग्रह] स्कूल छोड़ने और बहिष्करण के पैटर्न की निगरानी] बाल संरक्षण प्रणालियों के स्वतंत्र ऑडिट तथा लक्षित सुधारात्मक हस्तक्षेपों की रूपरेखा तैयार करने में सहायता करेगा।
  • SC/ST बच्चों के लिए बाल संरक्षण और न्याय तंत्र को मज़बूत करने हेतु 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाए] जिसमें POCSO विशेष न्यायालय, पीड़ित मुआवज़ा] परामर्श सेवाएँ और पुनर्वास कार्यक्रम शामिल हों, तथा जाति और लिंग आधारित हिंसा का सामना कर रही SC और ST बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाए।
    स्कूल-आधारित, जाति-संवेदनशील मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए 100 करोड़ रुपये का एक समर्पित आवंटन किया जाए, जिसमें भेदभाव, अलगाव और हिंसा को SC और ST बच्चों में मानसिक तनाव के प्रमुख कारणों के रूप में मान्यता दी जाए।
    भूमि अधिकार और कृषि
  • SC एवं ST समुदायों को कम से कम 5 एकड़ भूमि का पुनर्वितरण किया जाए। SC एवं ST समुदायों को कम से कम 5 एकड़ भूमि की व्यवहार्य सीमा तक पहुँचाने के लिए वर्तमान में कोई नवाचारी योजना उपलब्ध नहीं है। इसलिए सरकार को SC/ST बजट के अंतर्गत कृषि बजट का एक हिस्सा एक समर्पित भूमि खरीद योजना के लिए निर्धारित करना चाहिए। यह योजना राज्य-नेतृत्व में खेती योग्य भूमि के अधिग्रहण पर केंद्रित होनी चाहिए, जिसे SC/ST परिवारों में पुनर्वितरित किया जाए, और विशेष रूप से महिला मुखिया परिवारों को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि वर्तमान में महिलाओं के पास भूमि का बहुत छोटा हिस्सा है (SC महिलाओं के लिए 0-23 करोड़ और ST महिलाओं के लिए 0-16 करोड़)।
    जलवायु परिवर्तन
  • SC/ST समुदायों के लिए मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और लचीलापन से जुड़े कार्यक्रमों और योजनाओं को शामिल करते हुए एक अलग और विशेष जलवायु बजट लाने की सशक्त सिफ़ारिश की जाती है।
  • जलवायु लचीलापन और अनुकूलन के लिए बजट आवंटन में भी SCP-TSP के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए, क्योंकि आवंटन SC और ST की जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होना चाहिए।
  • राहत] पुनर्वास और हानि-नुकसान के लिए मुआवज़े से संबंधित कार्यक्रमों और योजनाओं में संशोधन किया जाना चाहिए] ताकि भूमिहीन SC और ST परिवारों को भी पात्र बनाया जा सके, और हानि-नुकसान के आकलन तथा राहत वितरण प्रक्रिया में समुदाय का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
  • सबसे कम कार्बन फुटप्रिंट होने के बावजूद, हाशिए पर मौजूद और संवेदनशील समुदाय जलवायु प्रभावों का अनुपातहीन बोझ वहन करते हैं] इसलिए उन्हें जलवायु नीति के केंद्र में रखा जाना चाहिए। सभी अनुकूलन तथा हानि-नुकसान से जुड़े उपायों को स्पष्ट रूप से ‘पुनरपरक न्याय ढाँचे’ द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। ऊर्जा संक्रमण यह सुनिश्चित करे कि इन समुदायों पर कोई सामाजिक, आर्थिक या पर्यावरणीय लागत न पड़े, और सबसे अधिक प्रभावित लोगों की समानता तथा संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
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BSN College campus, Bakshawala Vatika Road, Sanganer Jaipur में एक वृहद रोज़गार मेले का आयोजन https://parishkarpatrika.com/a-massive-job-fair-was-organized-at-bsn-college-campus-bakshawala-vatika-road-sanganer-jaipur/ https://parishkarpatrika.com/a-massive-job-fair-was-organized-at-bsn-college-campus-bakshawala-vatika-road-sanganer-jaipur/#respond Tue, 06 Jan 2026 15:17:51 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=4272

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। BSN group of institutions, JAIPUR द्वारा दिनांक 5 जनवरी 2026 को BSN College campus, Bakshawala Vatika Road, Sanganer Jaipur में एक वृहद रोज़गार मेले का आयोजन किया गया जिसमें देस प्रदेस से आईटी ,नोन आईटी ,प्रोफ़ेशनल ,बैंकिंग ,बीमा ,वाहन ,आदि से संबंधित लगभग 30 से अधिक कंपनियों व कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया इस जॉब फेयर में SBI बैंक ,HDFC बैंक ,ICICI बैंक ,भारतीय एयरटेल ,महिंद्रा एंड महिंद्रा , बाटा इंडिया , प्लूगा , स्वेगी , जीनस , ब्लैकिट , डीमाट ग्रेविटा , बजाज इंडिया, आदि अनेक कंपनियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया और रोज़गार पाने के लिए उपस्थित प्रतिभागियों का ऑनस्पाट साक्षात्कार के माध्यम से जॉब ऑफ़र लेटर दिए गए इस जॉब फेयर में महाविद्यालय के विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जिससे महाविद्यालय के 16 विद्यार्थियों काो रोज़गार के लिए चयन करनियुक्ति पत्र दिए गए।
कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ मेले के कोर्डिनेटर डॉ.सरोज जांगिड़ व श्री प्रदीप रावत ने सभी कंपनियों के प्रतिनिधियों का तिलक लगाकर स्वागत किया तथा बताया कि 450 से अधिक प्रतिभागियों ने रोज़गार मेले में रजिस्ट्रेशन कराया । कार्यक्रम के समाप्ति पर सफल अभ्यर्थियों को संस्था निदेशक डॉ.प्रकाश चंद्र खुल्वे के द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए है तथा सभी कंपनियों के प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर जॉब फेयर के सफल आयोजन पर धन्यवाद दिया तथा समय समय पर आयोजित होने वाले इस जॉब फेयर मैं उनसे पुनः आगमन की स्वीकृति ली ।

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आरएएस भर्ती-2024 साक्षात्कार का तृतीय चरण 5 जनवरी से होगा प्रारंभ https://parishkarpatrika.com/ras-recruitment-2024-third-phase-of-interview-will-start-from-january-5/ https://parishkarpatrika.com/ras-recruitment-2024-third-phase-of-interview-will-start-from-january-5/#comments Wed, 24 Dec 2025 13:45:34 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=4208

ब्यूरो चीफ / परिष्कार पत्रिका जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा बुधवार को विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के साक्षात्कारों का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। इसके अनुसार, राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2024 के तीसरे चरण के इंटरव्यू 5 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2026 तक चलेंगे। इस भर्ती के साक्षात्कार में उपस्थित होने वाले समस्त अभ्यर्थियों को ऑनलाइन भरे गए विस्तृत आवेदन पत्र डाउनलोड कर साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में मय समस्त प्रमाण-पत्रों की फोटो प्रति एवं समस्त मूल प्रमाण-पत्रों सहित प्रस्तुत करना होगा।

सहायक आचार्य सहित विभिन्न पदों का साक्षात्कार कार्यक्रम—

इसके अलावा, सहायक आचार्य (कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2023 अन्तर्गत भूगोल विषय के पदों हेतु अंतिम चरण के साक्षात्कार 5 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। वहीं, सहायक आचार्य वनस्पति विज्ञान और एबीएसटी के प्रथम चरण के साक्षात्कार का आयोजन 14 से 16 जनवरी 2026 तक किया जाएगा।

उक्त सभी पदों हेतु साक्षात्कार में उपस्थित होने वाले ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हाने पूर्व में अपना विस्तृत आवेदन-पत्र आयोग को प्रस्तुत नहीं किया है, वे विस्तृत आवेदन-पत्र आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में समस्त प्रमाण-पत्रों की फोटो प्रतियों के साथ अनिवार्य रूप से लाएं।

सहायक आचार्य (चिकित्सा शिक्षा विभाग) भर्ती-2021 अंतर्गत जनरल सर्जरी तथा ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनकोलॉजी के इंटरव्यू 5 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। सहायक कृषि अधिकारी भर्ती-2021 के पदों हेतु 14 और 15 जनवरी 2026 को साक्षात्कार का आयोजन किया जाएगा।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश—

साक्षात्कार के समय अभ्यर्थियों को स्वयं का नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, नवीनतम स्पष्ट फोटोयुक्त मूल पहचान-पत्र एवं समस्त मूल प्रमाण-पत्र मय फोटो प्रति साथ लाना अनिवार्य होगा। इन दस्तावेजों के अभाव में साक्षात्कार से वंचित कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पत्र यथासमय वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।

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साँची विवि में ‘मोदी युग’ और ‘अमृतकाल में भारत’ पर विशेष चर्चा, देश को स्थाई विकास की ओर ले जा रहे हैं मोदीः प्रो.संजय द्विवेदी https://parishkarpatrika.com/modi-is-taking-special-discussion-on-modi-era-and-india-in-amrit-period-in-sanchi-university-modi-is-taking-the-country-towards-permanent-development-prof-sanjay-dwivedi/ https://parishkarpatrika.com/modi-is-taking-special-discussion-on-modi-era-and-india-in-amrit-period-in-sanchi-university-modi-is-taking-the-country-towards-permanent-development-prof-sanjay-dwivedi/#respond Wed, 24 Sep 2025 12:55:56 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3586

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित किताबों पर चर्चा, पत्रकार और शिक्षाविद् प्रो. संजय द्विवेदी से हुआ संवाद
ब्यूरो चीफ/ परिष्कार पत्रिका भोपाल । साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय, सांची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित दो किताबों ‘मोदी युग-संसदीय लोकतंत्र का नया अध्याय’ और ‘अमृतकाल में भारत’ पर पुस्तक के लेखक प्रो. संजय द्विवेदी से विशेष परिचर्चा हुई। सेवा पर्व -2025 के अवसर पर अधिष्ठाता प्रो. नवीन कुमार मेहता ने लेखक से संवाद किया।
भरतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक रहे प्रो. संजय द्विवेदी ने सवालों के जवाब में बताया कि उन्होंने 2014 के पहले ही एक लेख में कह दिया था कि देश के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे। उन्होंने कहा कि अन्ना हज़ारे के आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोगों के अंदर उम्मीदों को जगाने वाले नेता बन गए, जिन्होंने सोशल इंजीनियरिंग को देश में धरातल पर उतारा है। नरेंद्र मोदी ने भारत की छवि का निर्माण किया है और वो भारत के लोगों को स्थायी विकास की ओर लेकर गए हैं। प्रो. द्विवेदी से जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विषय में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए दिमाग़ से ज़्यादा दिल की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि संघ का कोई विचार नहीं है, भारतीयता और हिंदुत्व का विचार ही संघ का विचार है। संघ विशुद्ध रूप से आचरण पर चलता है।
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि उपभोक्तावाद और आकांक्षावाद के कारण समाज दुखी हो रहा है। उन्होंने कहा कि गांधी जी का दर्शन था कि कम वस्तुएं उपयोग करो तो सुखी रहोगे। छात्रों से उन्होंने कहा कि वो सुधीर चंद्रा की लिखी किताब ‘गांधी एक असंभव संभावना’ ज़रूर पढ़ें जो कि गांधी जी की प्रार्थना सभाओं में उनके विचारों का विश्लेषण है। प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि हर पत्रकार की एक ‘पोलिटिकल लाइन’ होनी चाहिए लेकिन ‘पार्टी लाइन’ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विचारधारा हर एक व्यक्ति की होनी चाहिए और इसमें कोई समस्या नहीं है। आज विचारधारा का नहीं होना संकट है। जब उनसे पूछा गया कि लोग आजकल कम पढ़-लिख रहे हैं तो उन्होंने कहा कि आज का दौर आवाज़, वीडियो और स्थानीय भाषाओं का है क्योंकि मोबाइल पर लोग कम समय में जानकारी जानना पसंद करते हैं। लेकिन किताबें भी भारत में बहुत पढ़ी और बेची जा रही हैं। भले ही मोबाइल कितना भी भटकाव क्यों न पैदा करे। उन्होंने कहा कि लोगों को मीडिया साक्षरता देना आवश्यक हो गया है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने लेखक को उनकी किताबों के सृजन के लिए साधुवाद दिया। उन्होंने संस्कृत, पालि के ग्रंथों में भगवान बुद्ध के वर्णन पर भी प्रकाश डाला। इंटरव्यू के माध्यम से ही डीन प्रो. मेहता ने प्रो. संजय द्विवेदी का परिचय भी कराया। छात्रों-अधिकारियों ने भी उनसे सवाल पूछे। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव विवेक पाण्डेय ने किया। उन्होंने सेवा पर्व के आयोजन के लिए मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी व अतिरिक्त मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला को भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
सेवा पर्व के उपलक्ष में ही विश्वविद्यालय द्वारा 29 सितंबर को दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक एक राष्ट्रीय चित्रकारी प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है जिसमें सभी आयु वर्ग के लोग हिस्सा ले सकते हैं। अलग-अलग आयु वर्ग में प्रथम पुरस्कार 7000, 5000 और 3000 रखे गए हैं।

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असिस्टेंट प्रोफेसर (चिकित्सा शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2024, आयोग ने जारी की 17 विषयों की मॉडल उत्तरकुंजी, अभ्यर्थी 24 सितंबर से ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे आपत्ति https://parishkarpatrika.com/assistant-professor-medical-education-department-competitive-examination-2024-commission-released-17-subjects-model-north-candidates-from-24-september/ https://parishkarpatrika.com/assistant-professor-medical-education-department-competitive-examination-2024-commission-released-17-subjects-model-north-candidates-from-24-september/#respond Tue, 23 Sep 2025 17:31:55 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3570

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर (चिकित्सा शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2024 के अंतर्गत 17 विषयों की मॉडल उत्तरकुंजियां आयोग की वेबसाइट पर जारी कर दी हैं। इस संबंध में विस्तृत सूचना आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि उक्त परीक्षा अंतर्गत इन विषयों की परीक्षा का आयोजन 3 से 4 जुलाई 2025 तक किया गया था। यदि किसी भी अभ्यर्थी को इन मॉडल उत्तरकुंजियों पर कोई आपत्ति हो तो निर्धारित शुल्क के साथ 24 से 26 सितंबर 2025 को रात्रि 12:00 बजे तक अपनी आपत्ति ऑनलाईन दर्ज करवा सकता है।

आपत्तियां आयोग की वेबसाईट पर उपलब्ध मॉडल प्रश्न पत्र के क्रमानुसार ही प्रविष्ट करें। उक्त परीक्षाओं के मॉडल प्रश्न पत्र आयोग की वेबसाईट पर उपलब्ध है। आपत्ति प्रामाणिक (स्टैंडर्ड, ऑथेंटिक) पुस्तकों के प्रमाण सहित ऑनलाईन ही प्रविष्ट करे। वांछित प्रमाण संलग्न नहीं होने की स्थिति में आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। साथ ही उक्त परीक्षा में सम्मिलित अभ्यर्थियों के अतिरिक्त यदि कोई अन्य व्यक्ति आपत्ति दर्ज करवाता है, तो उस पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।

आयोग द्वारा प्रत्येक प्रश्न हेतु आपत्ति शुल्क रु 100/- (सेवा शुल्क अतिरिक्त) निर्धारित किया गया है। अभ्यर्थी एसएसओ पोर्टल पर लॉगिन कर रिक्रूटमेंट पोर्टल का चयन कर उक्त परीक्षा के लिए उपलब्ध लिंक (क्वेश्चन ऑब्जेक्शन) पर क्लिक कर प्रश्नों पर आपत्तियां दर्ज कराकर प्रति प्रश्न आपत्ति शुल्क रू. 100/-(सेवा शुल्क अतिरिक्त) के हिसाब से कुल आपत्ति शुल्क ई-मित्र कियोस्क अथवा अभ्यर्थी स्वयं भी रिक्रूटमेंट पोर्टल पर उपलब्ध पेमेंट गेटवे पर भुगतान कर आपत्तियां दर्ज कर सकता है। आयोग द्वारा शुल्क वापस लौटाने का प्रावधान नहीं है। शुल्क के अभाव में आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएगी। आपत्तियां केवल ऑनलाईन ही प्रस्तुत करें। अन्य किसी माध्यम से भेजी गई आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएगी। आपत्तियां केवल एक बार ही ली जाएगी। ऑनलाईन आपत्तियों का लिंक दिनांक 24 से 26 सितंबर 2025 को रात्रि 12:00 बजे तक ही उपलब्ध है, उसके पश्चात् लिंक निष्क्रिय हो जाएगा। ऑनलाईन आपत्ति दर्ज करने में किसी प्रकार की तकनीकी कठिनाई होने पर अभ्यर्थी recruitmenthelpdesk@rajasthan.gov.in पर ईमेल से अथवा फोन नम्बर 9352323625 व 7340557555 पर संपर्क कर सकते हैं।

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प्राध्यापक एवं कोच (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2024, आयोग ने जारी की राजनीति विज्ञान विषय की विचारित सूची https://parishkarpatrika.com/professor-and-coach-school-education-competitive-examination-2024-commission-released-the-thought-list-of-political-science-subject/ https://parishkarpatrika.com/professor-and-coach-school-education-competitive-examination-2024-commission-released-the-thought-list-of-political-science-subject/#respond Tue, 23 Sep 2025 17:08:27 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3567

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर।  राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा प्राध्यापक एवं कोच (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2024 अंतर्गत राजनीति विज्ञान विषय के पदों हेतु विचारित सूची जारी की गई है। सूची में 6 अभ्यर्थियों को पात्रता जांच लिए अस्थाई रूप से सम्मिलित किया गया है। विस्तृत सूचना आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

आयोग सचिव ने बताया कि यह सूची चयन प्रक्रिया में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों की अभ्यर्थिता सुनिश्चित करने के क्रम में केवल दस्तावेज सत्यापन के उद्देश्य से है। यह चयन सूची अथवा वरीयता सूची नहीं है। अंतिम रूप से सफल अभ्यर्थियों की सूची संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेज सत्यापन कराए जाने के पश्चात आयोग द्वारा जारी की जाएगी।

उक्त परीक्षा की विचारित सूची में सम्मिलित अभ्यर्थियों को विस्तृत आवेदन-पत्र ऑनलाइन भरने होंगे। विस्तृत आवेदन पत्र ऑनलाइन भरने का लिंक 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2025 (रात्रि 11.59) तक खोला जाएगा। अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन तथा दस्तावेज सत्यापन के संबंध में आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की पालना भी आवश्यक रूप से सुनिश्चित करनी होगी।

माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा की जाएगी विस्तृत आवेदन-पत्र व दस्तावेजों की जांच : विचारित सूची में अस्थाई रूप से सम्मिलित किए गए सभी अभ्यर्थियों को सूचित किया जाता है कि वे अपने एसएसओ आईडी के माध्यम से रिक्रूटमेंट पोर्टल पर माय रिक्रूटमेंट-डीटेल्ड फॉर्म कम स्क्रूटनी- अप्लाई नाउ का चयन कर अपना विस्तृत आवेदन पत्र ऑनलाइन भरें। विस्तृत आवेदन-पत्र व दस्तावेजों की जांच संबंधित विभाग (माध्यमिक शिक्षा विभाग) द्वारा ही की जायेगी।

अतः ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने व सबमिट करने के उपरांत प्रिंट ऑप्शन पर जाकर सम्पूर्ण विस्तृत आवेदन पत्र को 02 प्रतियों में प्रिंट कर अपने पास संभाल कर रखें तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग की सूचना के अनुसार निर्धारित दिनांक, समय व स्थान पर विस्तृत आवेदन-पत्र (दो प्रतियों में) मय समस्त मूल दस्तावेजों व स्वयं सत्यापित प्रतियों सहित उपस्थित होवें। इस हेतु संबंधित विभाग द्वारा ही उचित माध्यम से अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन हेतु सूचित कराने की कार्यवाही संपादित की जायेगी एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा अलग से कोई सूचना अभ्यर्थियों को प्रेषित नहीं की जायेगी। विभाग द्वारा दस्तावेज सत्यापन हेतु निर्धारित तिथि को उपस्थित नहीं होने पर अभ्यर्थी को अपात्र मानते हुए परिणाम में विचारित नहीं किया जायेगा। संबंधित विभाग से दस्तावेज जांच/सत्यापन उपरांत, पात्र अभ्यर्थियों की सूची विभाग द्वारा आयोग को भेजी जाएगी, जिसके उपरांत आयोग द्वारा परिणाम जारी कर चयनित अभ्यर्थियों के नाम नियुक्ति हेतु संबंधित विभाग को अभिस्तावित किए जायेंगे। अभ्यर्थियों की पात्रता जांच विज्ञापन की शर्तों व नियमों के अनुसार की जाएगी। पात्रता की समस्त शर्तें नियमानुसार पूर्ण नहीं करने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता रद्द कर दी जाएगी।

386 अभ्यर्थी अयोग्य घोषित : उक्त परिणाम के अंतर्गत आयोग द्वारा 10% से अधिक प्रश्नों में पांच विकल्पों में से कोई भी विकल्प नहीं भरने के कारण 386 अभ्यर्थियों को परीक्षा हेतु अयोग्य घोषित किया गया है। इन अभ्यर्थियों के रोल नंबर पृथक से आयोग की वेबसाइट पर जारी किए गए हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75 वेंं जन्मदिन (17 सितंबर) पर विशेष: मोदी की बातों में है माटी की महक, प्रधानमंत्री का संवाद देश और दिलों को जोड़ता है : प्रो. संजय द्विवेदी https://parishkarpatrika.com/prime-minister-narendra-modis-75th-birthday-is-in-the-talk-of-special-modi-on-september-17/ https://parishkarpatrika.com/prime-minister-narendra-modis-75th-birthday-is-in-the-talk-of-special-modi-on-september-17/#respond Tue, 16 Sep 2025 11:34:05 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3486

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपना 75 वां जन्मदिन बुधवार को मनाएंगे। उनकी जीवन यात्रा रचना, सृजन और संघर्ष की त्रिवेणी है। उनके व्यक्तित्व का सबसे खास पक्ष है संचार और संवाद।
भारत जैसे महादेश को संबोधित करना आसान नहीं है। इस विविधता भरे देश में वाक् चातुर्य से भरे विद्वानों, राजनेताओं, प्रवचनकारों और अदीबों की कमी नहीं है। अपनी वाणी से सम्मोहित कर लेने वाले अनेक विद्वानों को हमने सुना और परखा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षमताएं उनमें विलक्षण हैं। वे हमारे समय के अप्रतिम संचारकर्ता हैं। संचार का विद्यार्थी होने के नाते मैं उनकी तरफ बहुत विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखता हूं, किंतु वे अपनी देहभाषा, भाव-भंगिमा, शब्दावली और वाक् चातुर्य से जो करते हैं, उसमें कमियां ढूंढ पाना मुश्किल है। उनका आत्मविश्वास और शैली तो विलक्षण है ही, वे जो कहते हैं उस बात पर भी सहज विश्वास करने का मन होता है। मोदी सही मायने में संवाद के महारथी हैं। वे जनसभाओं के नायक हैं तो एक्स जैसे नए माध्यमों पर भी उनकी तूती बोलती है। पारंपरिक मंचों से लेकर आधुनिक सोशल मीडिया मंचों पर उनकी धमाकेदार उपस्थिति बताती है संवाद और संचार को वे किस बेहतर अंदाज में समझते हैं।

गुजरात के एक छोटे से कस्बे बड़नगर में पले-बढ़े नरेंद्र मोदी में ऐसा क्या है जो लोंगों को सम्मोहित करता है? उनकी राजनीतिक यात्रा भी विवादों से परे नहीं रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें जिस तरह निशाना बनाकर उनकी छवि मलिन करने के सचेतन प्रयास हुए, वे सारे प्रसंग लोकविमर्श में हैं। बावजूद इसके वे हिंदुस्तानी समाज के नायक बने हुए हैं तो इसके पीछे उनकी संप्रेषण कला और देहभाषा का अध्ययन प्रासंगिक हो जाता है। नरेंद्र मोदी देश के ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो कभी सांसद नहीं थे और पहली बार लोकसभा पहुंचकर देश के प्रधानमंत्री बने। 2014 के आमचुनावों की याद करें तो देश किस तरह निराशा और अवसाद से भरा हुआ था। लोग राजनीति और राजनेताओं से उम्मादें छोड़ चुके थे। अन्ना आंदोलन से एक अलग तरह का गुस्सा लोगों के मन में पनप रहा था। तभी एक आवाज गूंजती है ‘मैं देश नहीं झुकने दूंगा।’ दूसरी आवाज थी ‘अच्छे दिन आने वाले हैं।’ ये दो आवाजें थीं नरेंद्र मोदी की, जो देश को एक विकल्प देने के लिए मैदान में थे। राजनीति में आश्वासनपरक आवाजों का बहुत मतलब नहीं होता, क्योंकि राजनीति तो सपनों और आश्वासनों के आधार पर ही की जाती है। किंतु नरेंद्र मोदी ने इस दौर में जो कुछ कहा उसे देश ने बहुत ध्यान से सुना। उनका दल लंबे समय से सत्ता से बाहर था और वे अपने दल की ओर से प्रधानमंत्री के उम्मीदवार बनाए जा चुके थे। जाहिर है अवसाद और निराशा से भरी जनता को एक अवसर था परख करने का। मोदी इस अवसर का लाभ उठाते हैं और जनता के मन में भरोसा जगाने का प्रयास करते हैं। वे लगातार अपनी सभाओं में कहते हैं कि वे ही इस देश को उसके संकटों से उबार सकने की क्षमता से लैस हैं। जनता मुग्ध होकर उनके भाषणों को सुनती है। अपनी अप्रतिम संवादकला से वे लोगों में यह भरोसा जगाने में सफल हो जाते हैं कि वे कुछ कर सकते हैं।

2014 में मोदी सत्ता में आते हैं और संचार के सबसे प्रभावकारी माध्यम को साधते हैं। वे आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ के माध्यम से लोगों से संवाद का अवसर चुनते हैं। यानि उनका संवाद अवसर और चुनाव केंद्रित नहीं है, निरंतर है। उनमें एक सातत्य है। बदलाव के लिए, परिवर्तन के लिए, लोकजागरण के लिए। वे मन की बात को राजनीतिक विमर्शों के बजाए लोकविमर्शों का केंद्र बनाते हैं। जिसमें जिंदगी की बात है, सफाई की बात है, शिक्षा और परीक्षा की बात है, योग की बात है। मन की बात के माध्यम से वे खुद को एक ऐसे अभिभावक की तरह पेश करने में सफल होते हैं, जिसे देश और देशवासियों की चिंता है। संवाद की यही सफलता है और यही उसका उद्देश्य है। अपने लक्ष्य समूह को निरंतर अपने साथ जोड़े रखना मोदी की संवाद कला की दूसरी सफलता है। करोना संकट में भी हमने देखा कि उनकी अपीलों को किस तरह जनमानस ने स्वीकार किया, चाहे वे करोना वारियर्स के सम्मान में दीप जलाने और थाली बजाने की ही क्यों न हों। यह बातें बताती हैं कि अपने नायक पर देश का भरोसा किस तरह कायम है।

मोदी अपनी देहभाषा से कमाल करते हैं। कई बार चौंकाते भी हैं। देश की गहरी समझ भी इसका बड़ा कारण है, यही कारण है वे देश के जिस हिस्से में होते हैं वहां की स्थानीय बोली, वस्त्रों और प्रतीकों का सचेत इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही उनकी पोशाकें, उनका हाफ कुर्ता, जैकेट्स आज एक तरह से स्टाइल स्टेटमेंट है। उनका अनुसरण कर नौजवान आज खद्दर और सूती कपड़ों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। हम विश्लेषण करें तो पाते हैं कि उनका समर्पित जीवन और ईमानदारी से उनकी वाणी का भी एक रिश्ता है। जब हम सिर्फ बोलते हैं तो उसका असर अलग होता है। किंतु अगर हम जो बोलते हैं उसमें कृतित्व भी शामिल हो तो बात का असर बढ़ जाता है। नरेंद्र मोदी अपनी असंदिग्ध ईमानदारी, राष्ट्रनिष्ठा और देशभक्ति के प्रतीक हैं। उनका समूचा जीवन राष्ट्र के लिए अर्पित है। ऐसा व्यक्ति जब कोई बात कहता है तो उसका असर बहुत ज्यादा होता है। क्योंकि आपकी वाणी को आपके जीवन का समर्थन है। सिर्फ देश की बात करना और देश के लिए जीना दो बातें हैं। मुझे लगता है जीवन और कर्म में एक रूप होने के नाते मोदी बाकी राजनेताओं से बहुत आगे निकल जाते हैं। क्योंकि उनकी राष्ट्रनिष्ठा पर सबको भरोसा है, इसलिए उनकी वाणी पर भी सहज विश्वास आता है। इस तरह उनकी वाणी ‘भाषण’ न होकर ‘ह्दय से ह्दय के संवाद’ में बदल जाती है। लोंगों को भरोसा है कि वे हमारी ही बात कर रहे हैं और हमारे लिए ही कर रहे हैं। मोदी ने अपनी साधारण पृष्ठभूमि की बात कभी छिपाई नहीं, जब भी उनकी साधारण स्थितियों का मजाक बनाया गया तो उसे भी उन्होंने एक सफल अभियान में बदल दिया। ‘चाय पर चर्चा’ का कार्यक्रम किस तरह बना, उसके संदर्भ हम सबके ध्यान में हैं। नरेंद्र मोदी सही मायने में सामान्य जनों में भरोसा जगाते हैं कि अगर संकल्प हों, इच्छाशक्ति हो तो व्यक्ति क्या नहीं कर सकता। यह एक बात लोगों को उनसे कनेक्ट करती है। अनेक राजनेता हैं, जो साधारण पृष्ठभूमि से आए हैं। किंतु उनका या तो अपनी जड़ों से उनका रिश्ता टूट गया है या वे उन विथिकाओं को याद नहीं करना चाहते। जबकि नरेंद्र मोदी अपनी जड़ों को नहीं भूलते वे हमेशा उसे याद करते हैं और खुद पर भरोसा करते हैं। यही कारण है उनका कनेक्ट सीधा जनता से बनता है। वे प्रधानमंत्री होकर भी अपने से नजर आते हैं। संचार, संवाद और पोजिशिनिंग की यह कला उनमें सहज है। बिना जतन के भी वे इन सबको साधते हैं और साधते रहेंगें क्योंकि आसमान पर होकर भी माटी की सोंधी महक उन्हें जड़ों से जोड़े रखती है। इसलिए उनका संवाद दिलों को जोड़ता है, देश को भी।
(लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)

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2030 तक दुनिया का हर पांचवां व्यक्ति बोलेगा हिंदी : प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी https://parishkarpatrika.com/by-2030-every-fifth-person-in-the-world-will-say-hindi-prof-sanjay-dwivedi/ https://parishkarpatrika.com/by-2030-every-fifth-person-in-the-world-will-say-hindi-prof-sanjay-dwivedi/#respond Mon, 15 Sep 2025 04:35:18 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3449

हिंदी दिवस -14 सितंबर पर विशेष.. हिंदी हैं हम
ब्यूरो चीफ / परिष्कार पत्रिका। भाषा संवाद संप्रेषण का सशक्त माध्यम है। मनुष्य को इसलिए भी परमात्मा की श्रेष्ठ कृति कहा जाता है कि वह भाषा का उपयोग कर अपने भावों को अभिव्यक्त करने में सक्षम है। यही विशेषता है, जो मनुष्य को अन्य प्राणियों से भिन्न करती है। हिंदी एक बहुआयामी भाषा है। यह बात इसके प्रयोग क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए भी समझी जा सकती है। यह अलग बात है कि हिंदी भाषा की बात करते समय हम सामान्यतः हिंदी साहित्य की बात करने लगते हैं। इसमें संदेह नहीं कि साहित्यिक हिंदी, हिंदी के विभिन्न आयामों में से एक है, लेकिन यह केवल हिंदी के एक बड़े मानचित्र का छोटा-सा हिस्सा है, शेष आयामों पर कम विचार हुआ है और व्यावहारिक हिंदी की पृष्ठभूमि पर विचार करते हुए तो और भी कम विमर्श हमारे सामने हैं। यदि हिंदी भाषा के आंतरिक इतिहास का उद्घाटन करना हो तो नामकरण ही उसका आधार बन सकता है। हिंदी, हिंदवी, हिन्दुई और दकिनी के विकास क्रम में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि अलग-अलग समय में एक ही भाषा के भिन्न नाम प्रचलित रहे हैं। हिंदी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। यह करीब 11वीं शताब्दी से ही राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित रही है। उस समय भले ही राजकीय कार्य संस्कृत, फारसी और अंग्रेजी में होते रहे हों, लेकिन संपूर्ण राष्ट्र में आपसी संपर्क, संवाद, संचार, विचार, विमर्श, जीवन और व्यवहार का माध्यम हिंदी ही रही है।

भारतेंदु हरिश्चन्द्र, स्वामी दयानन्द सरस्वती, महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों ने राष्ट्रभाषा हिंदी के माध्यम से ही संपूर्ण राष्ट्र से सम्पर्क किया और सफलता हासिल की। इसी कारण आजादी के पश्चात संविधान-सभा द्वारा बहुमत से ‘हिंदी’ को राजभाषा का दर्जा देने का निर्णय किया था। जैसे-जैसे भाषा का विस्तार क्षेत्र बढ़ता जाता है, वो भाषा उतने ही अलग-अलग रूप में विकसित होना शुरू हो जाती है, यही हिंदी भाषा के साथ हुआ, क्योंकि यह भाषा पहले केवल बोलचाल की भाषा तक ही सीमित थी। उसके बाद साहित्यिक भाषा के क्षेत्र में इसे जगह मिली, और फिर समाचार-पत्रों में ‘हिंदी पत्रकारिता’ का विकास हुआ। अपनी अनवरत यात्रा के कारण स्वतन्त्रता के बाद हिंदी, भारत की राजभाषा घोषित की गई तथा उसका प्रयोग कार्यालयों में होने लगा और हिंदी का एक राजभाषा का रूप विकसित हुआ।

अगर हम आंकड़ों में हिंदी की बात करें तो 260 से ज्यादा विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। 64 करोड़ लोगों की हिंदी मातृभाषा है। 24 करोड़ लोगों की दूसरी और 42 करोड़ लोगों की तीसरी भाषा हिंदी है। इस धरती पर 1 अरब 30 करोड़ लोग हिंदी बोलने और समझने में सक्षम हैं। 2030 तक दुनिया का हर पांचवा व्यक्ति हिंदी बोलेगा। यूएई और फिजी जैसे देशों में हिंदी को तीसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। हिंदी की देवनागरी लिपि वैज्ञानिक लिपि मानी जाती है, ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में 18 हजार शब्द हिंदी के शामिल हुए हैं, और सबसे बड़ी बात कि जो तीन साल पहले अंग्रेजी इंटरनेट की सबसे बड़ी भाषा थी, अब हिंदी ने उसे पीछे छोड़ दिया है। गूगल सर्वेक्षण बताता है कि इंटरनेट पर डिजिटल दुनिया में हिंदी सबसे बड़ी भाषा है।

अक्सर ये प्रश्न पूछा जाता है कि हिंदी ही हमारी राजभाषा क्यों? इसका जवाब बहुत पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिया था। महात्मा गांधी ने किसी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिये जाने के लिए तीन लक्षण बताए थे। पहला कि वो भाषा आसान होनी चाहिए। दूसरा प्रयोग करने वालों के लिए वह भाषा सरल होनी चाहिए। और तीसरा उस भाषा को बोलने वालो की संख्या अधिक होनी चाहिए। अगर ये तीनों लक्षण किसी भाषा में थे, हैं और रहेंगे, तो वो सिर्फ हिंदी भाषा ही है। आज भाषा को लेकर संवेदनशील और गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। इस सवाल पर भी सोचना चाहिए कि क्या अंग्रेजी का कद कम करके ही हिंदी का गौरव बढ़ाया जा सकता है? जो हिंदी कबीर, तुलसी, रैदास, नानक, जायसी और मीरा के भजनों से होती हुई प्रेमचंद, प्रसाद, पंत और निराला को बांधती हुई, भारतेंदु हरिशचंद्र तक सरिता की भांति कलकल बहती रही, आज उसके मार्ग में अटकले क्यों हैं?

यदि हम सच में चाहते हैं कि हिंदी भाषा का प्रभुत्व राजभाषा के रूप में बना रहे, तो हमें इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना होगा। सरकारी कामकाज में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी। ऐसे में भरोसा फिर उन्हीं नौजवानों का करना होगा, जो एक नए भारत के निर्माण के लिए तैयार हैं। जो अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं। भरोसे और आत्मविश्वास से दमकते ऐसे तमाम चेहरों का इंतजार भारत कर रहा है। ऐसे चेहरे, जो भारत की बात भारत की भाषाओं में करेंगे। जो अंग्रेजी में दक्ष होंगे, किंतु अपनी भाषाओं को लेकर गर्व से भरे होंगे। उनमें ‘एचएमटी’ यानी ‘हिंदी मीडियम टाइप’ या ‘वर्नाकुलर पर्सन’ कहे जाने पर हीनता पैदा नहीं होगी, बल्कि वे अपनी भाषा से और अपने काम से लोगों का और दुनिया का भरोसा जीतेंगे। हिंदी और भारतीय भाषाओं के इस समय में देश ऐसे युवाओं का इंतजार कर है, जो अपनी भारतीयता को उसकी भाषा, उसकी परंपरा, उसकी संस्कृति के साथ समग्रता में स्वीकार करेंगे। जिनके लिए परंपरा और संस्कृति एक बोझ नहीं, बल्कि गौरव का कारण होगी। यह नौजवानी आज कई क्षेत्रों में सक्रिय दिखती है। खासकर सूचना-प्रौद्योगिकी की दुनिया में। जिन्होंने इस भ्रम को तोड़ दिया, कि सूचना-प्रौद्योगिकी की दुनिया में बिना अंग्रेजी के गुजारा नहीं है। ये लोग ही हमें भरोसा जगा रहे हैं। ये भारत को भी जगा रहे हैं। आज भरोसा जगाते ऐसे कई दृश्य हैं, जिनके श्रीमुख और कलम से व्यक्त होती हिंदी देश की ताकत है।

(लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं।)

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आरपीएससी ने विभिन्न पदों के लिए साक्षात्कार की तिथियां घोषित की https://parishkarpatrika.com/rpsc-announces-interview-dates-for-various-posts/ https://parishkarpatrika.com/rpsc-announces-interview-dates-for-various-posts/#respond Fri, 12 Sep 2025 11:11:11 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3403

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर।  आरपीएससी  ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के साक्षात्कार की तिथियां घोषित की है। इससे एक ओर शिक्षित बेरोजगारों को जल्द रोजगार मिलेगा, दूसरी ओर विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्मिकों की कमी दूर होगी, आमजन को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

जारी कार्यक्रम के अनुसार सहायक कृषि अधिकारी (कृषि विभाग) भर्ती-2018 के प्रथम चरण के साक्षात्कार 6 से 16 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित किए जाएंगे। सहायक आचार्य (सुपर स्पेशलिटी) भर्ती- 2021 में  नेफ्रोलॉजी, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी के साक्षात्कार 24 सितंबर को और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के साक्षात्कार 25 सितंबर को होंगे। 

साक्षात्कार के समय अभ्यर्थियों को अपना नवीनतम पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो, मूल पहचान-पत्र और सभी मूल प्रमाण-पत्रों के साथ उनकी फोटोकॉपी भी लेकर आना है।  अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पत्र आयोग की वेबसाइट पर यथासमय अपलोड कर दिए जाएंगे।

सहायक कृषि अधिकारी भर्ती के उन अभ्यर्थियों को, जिन्होंने अभी तक विस्तृत आवेदन-पत्र आयोग को प्रस्तुत नहीं किया है, को आयोग की वेबसाइट से विस्तृत आवेदन-पत्र डाउनलोड कर, उसे भरकर और सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी के साथ साक्षात्कार के समय दो प्रतियों में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।

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जीएसटी में बदलाव से अर्थव्यवस्था को लगेंगे चार-चांद : एडवोकेट दीपक जग्गा अध्यक्ष https://parishkarpatrika.com/changes-in-gst-will-make-the-economy-four-moons/ https://parishkarpatrika.com/changes-in-gst-will-make-the-economy-four-moons/#respond Sat, 06 Sep 2025 13:36:13 +0000 https://parishkarpatrika.com/?p=3361

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। सरकार ने आम आदमी का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए जीएसटी ढांचे में फेर बदल कर बहुत ही बेहतरीन काम किया है जीएसटी में जो व्यवहारिक कमियां थी उनको दूर करने के लिए बहुत लंबे समय से वित्त मंत्री से लोग शिकायत कर रहे थे।

एडवोकेट दीपक जग्गा अध्यक्ष, मानसरोवर व्यापार मंडल, ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दूरदर्शिता के परिणाम स्वरूप ही यह काम हो पाया है जीएसटी की विसंगतियों के कारण आम आद‌मी बहुत परेशान हो रहा था। कई जरूरत की चीजों पर अनावश्यक जीएसटी की दरें ज्यादा होने से आम आदमी परेशान था 12% और 28% का स्लैब हटा कर जीएसटी प्रणाली को ओर सरल करने की कोशिश की गई है। बहुत सारी चीजों में जीएसटी दरें कम करके आम आदमी की क्रय क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। जहां एक ओर वित्त मंत्री ने इस वित्त वर्ष भारत की जनता को 12 लाख तक की इनकम को कर मुक करके एक तोह‌फा पहले भी दिया है! वहीं यह दूसरा तोहफा जीएसटी का सरलीकरण करके दिया है। इसके दूरगामी परिणाम जल्दी ही देखने को मिलेगें। इन दोनों कदमों के परिणाम स्वरूप आने वाले सालो में बाजार में बहुत पैसा आएगा और लोगो कि क्रपक्षमता भी बढ़ेगी ओर जो माननीय प्रधान‌मंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो भारतीय अर्थव्यवस्था को तीसरे नंबर पर लाने का सपना देखा है वह भी जल्दी ही साकार होगा।

मेरा यह मानना है कि आम आदमी और व्यापारिक संगठनों से व्यवहारिक सुझाव आमन्त्रित कर वित्त व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के नियमित प्रयास होने चाहिये। रोटी , कपड़ा और मकान हर एक भारतवासी की जरूरत है सरकार को इसे प्रत्येक व्यकि तक पहुंचाने के पूरे प्रयास करने चहिये! भारत के प्रधानमंत्री ने स्वय 18 घंटे काम करके और अपने लिए कुछ ना बना कर देश के हर राजनीतिक नेता के लिए एक उदाहरण पेश किया है। अगर छोटे बड़े सभी नेता गरीब को गणेश मानकर काम करेंगे तो उनकी लोकप्रियता हमेशा बढ़‌ती जायेगी। कुल मिलाकर जीएसटी की दरों में बदलाव एक प्रशंसा योग्य कदम है। यह सरकार की दृढ़ इच्छा और दूरगामी सोच का परिणाम है।

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