
राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं के आयोजन और संस्कृत शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में संस्कृत भाषा एवं शिक्षा के संरक्षण, संवर्धन और विभागीय गतिविधियों की प्रगति पर चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि संस्कृत समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे सभी क्षेत्रों में प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संस्कृत भाषा में उपलब्ध ताम्रपत्रों का उचित कैटलॉग तैयार कर उनका डिजिटल रूपांतरण करने के निर्देश दिए, ताकि इस ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित रखते हुए भावी पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाया जा सके।
मुख्य सचिव ने संस्कृत के अध्ययन, अनुसंधान और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। इनमें प्रदेश और देश के प्रमुख विद्वानों एवं विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए।
संस्कृत शिक्षा को रोजगार एवं कैरियर से जोड़ने पर जोर— मुख्य सचिव ने संस्कृत विद्यालयों में संचालित कार्यक्रमों और पढ़ाए जा रहे विषयों की समीक्षा करते हुए शिक्षा को रोजगार एवं कैरियर के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने पीएम श्री विद्यालयों की तर्ज पर प्रधानाचार्यों एवं प्राचार्यों को आमंत्रित कर संस्कृत भाषा पर कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि संस्कृत शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों में रुचि बढ़े तथा इसे मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। बैठक में जगतगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु मदन मोहन झा, विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार गुंजन सोनी, संस्कृत शिक्षा विभाग की आयुक्त सुश्री प्रियंका जोधावत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।