कानून-व्यवस्था को लेकर एक्शन मोड में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आईजी-एसपी को दो टूक, क्षेत्र में अपराध हुआ तो अधिकारी होंगे जिम्मेदारसिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं, नशा तस्करी का पूरा नेटवर्क करें ध्वस्त

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बदमाशों की कांपे रूह- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा , संगठित अपराधों का राजस्थान में न हो कोई नामोनिशान, महिलाओं और बच्चों से जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ हो बड़ी और कड़ी कार्रवाई, – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा- अलवर, श्रीगंगानगर, भरतपुर के पुलिस अधिकारियों को किया जवाब-तलब- गोगुन्दा में चरागाह भूमि अतिक्रमण मामले में बड़े अधिकारी को नोटिस जारी

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार पत्रिका जयपुर।  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को राज्य में कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ ऐसी प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई होनी चाहिए जिससे बदमाशों की रूह कांप उठे। अब क्षेत्र में होने वाले अपराधों की जिम्मेदारी सीधे संबंधित आईजी और एसपी की होगी। उन्होंने गृह विभाग एवं पुलिस अधिकारियों को दो टूक कहा कि प्रदेश में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों को फटकार लगाते हुए कहा कि संगठित अपराध, साइबर क्राइम और नशा तस्करी के मामलों में सिर्फ गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा बल्कि इन अपराधों का पूरा नेटवर्क ध्वस्त होना चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गोगुंदा में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस जारी किया गया। उन्होंने अलवर, श्रीगंगानगर और भरतपुर में हाल में हुई आपराधिक घटनाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों और उनके आकाओं पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए कि आने वाले समय में कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। उन्होंने कहा कि लगातार ठोस परिणाम देने के बावजूद एक भी अप्रिय घटना पुलिस और प्रदेश की छवि को धूमिल कर सकती है। उन्होंने बताया कि 2023 की तुलना में संगठित अपराध और फायरिंग की घटनाओं में कमी आई है लेकिन इस गिरावट की रफ्तार और बढ़नी चाहिए।

अवैध हथियारों की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएं— मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध हथियार संगठित अपराध की रीढ़ है और संगठित अपराध को रोकने के लिए इसे तोड़ना बहुत जरूरी है। जिन जिलों में आर्म्स एक्ट के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, वहां अवैध हथियारों की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। हथियार बरामद होने की स्थिति में सिर्फ उस अपराधी तक ही कार्रवाई सीमित न रहे बल्कि उस पूरे चेन सिस्टम का पता लगाकर सरगना तक पहुंच कर इस सिस्टम को ध्वस्त करने का लक्ष्य रखना होगा।

अपराधियों के सोशल एंड फाइनेंशियल नेटवर्क का करें खात्मा— उन्होंने अपराधियों के सोशल नेटवर्क के साथ-साथ फाइनेंशियल नेटवर्क का खात्मा करने पर जोर देते हुए कहा कि सोशल मीडिया की निगरानी करते हुए ऐसे युवाओं पर विशेष नजर रखें जो अपराधियों को फॉलो करते हैं। साथ ही, भू माफिया गतिविधि और हवाला लेन-देन पर अंकुश लगाकर अपराधियों की आय के स्रोतों को भी बंद करना होगा। साथ ही, ड्रग तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त, कुर्क एवं ध्वस्तीकरण करने की कार्रवाई में तेजी लाई जाए।

साइबर ठगी  रोकने के लिए बढ़ाएं साइबर पेट्रोलिंग— मुख्यमंत्री ने साइबर पेट्रोलिंग बढ़ाने और साइबर सेल में इसके लिए विशेष कार्मिक तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई कर आमजन का विश्वास बहाल करना पुलिस की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि साइबर ठगी का एक भी नेटवर्क राजस्थान की धरती पर बचने ना पाए।

महिलाओं एवं बच्चों के विरूद्ध अपराधों में दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई— मुख्यमंत्री ने महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराधों को अत्यंत गंभीर बताते हुए ऐसे मामलों में त्वरित, कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने और अपराधियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी रेंज आईजी और पुलिस अधीक्षकों को एनडीपीएस, गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर एवं अवैध हथियारों से जुड़ी गतिविधियों और संगठित अपराध से जुड़े लंबित मामलों का व्यक्तिगत विश्लेषण करने और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन जिलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

जिलों में नियमित रूप से हो सीएलजी की बैठक— मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में नियमित रूप से सीएलजी (कम्युनिटी लाइजन ग्रुप) की बैठक आयोजित की जाए। इससे पुलिस और आमजन के बीच बेहतर संवाद एवं समन्वय सुनिश्चित होगा तथा कानून व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सीएलजी बैठकों की मुख्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाए, जिससे इनके माध्यम से प्राप्त सुझावों एवं शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग एवं पुलिस विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थिति रहे। वहीं, रेंज महानिरीक्षक एवं समस्त जिलों के पुलिस अधीक्षक वी.सी. के जरिए बैठक से जुड़े।

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