विद्यार्थियों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एसीएस ने दिए निर्देश—बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी, जरूरत पड़ने पर सरकार देगी परिवहन सुविधा

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विद्यालय भवनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, जर्जर भवनों का तत्काल पुनः सर्वे कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें— एसीएस, प्रारम्भिक शिक्षा विभाग

ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार जयपुर।  प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजेश कुमार यादव ने बुधवार को शासन सचिवालय में राज्यभर के सरकारी विद्यालयों की सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं, नामांकन, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता तथा जर्जर विद्यालय भवनों की स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की।

अतिरिक्त मुख्य सचिव यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालय खुल चुके हैं। ऐसे में प्रत्येक जिले में जर्जर एवं असुरक्षित विद्यालय भवनों का पुनः सर्वे कराया जाए तथा विद्यार्थियों के बैठने की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि किसी विद्यालय भवन में सुरक्षा संबंधी समस्या हो तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। जिस भवन में विद्यार्थियों को स्थानांतरित किया जाए, उसकी भी तकनीकी जांच कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि आवश्यकता होने पर निकटवर्ती राजकीय विद्यालय अथवा अन्य सुरक्षित भवन का उपयोग किया जाए। यदि विद्यार्थियों को दूसरे विद्यालय में भेजना पड़े तो उनके लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की जाए, जिसका व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर दो पारियों में अध्ययन संचालित करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई असुरक्षित भवन अथवा खुले स्थान पर नहीं कराई जाए। इस संबंध में तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट राज्य स्तर पर  भिजवाई जाए। 

यादव ने वर्षा ऋतु को देखते हुए सभी विद्यालयों की छतों का तत्काल निरीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी छत पर वर्षा का पानी जमा नहीं होना चाहिए तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आवश्यकतानुसार छतों की मरम्मत कराई जाए तथा यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भवन की नींव में पानी प्रवेश न करे। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि कोई विद्यालय भवन असुरक्षित पाया जाता है तो वहां संचालित कक्षाओं को तत्काल निकटतम राजकीय विद्यालय, सार्वजनिक भवन अथवा अन्य सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए।

उन्होंने सभी जिलों को विद्यालयों का सेफ्टी ऑडिट एवं पुनः सर्वे कर उसकी रिपोर्ट शीघ्र राज्य स्तर पर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण विद्यार्थियों की छुट्टी के दिन ही कराया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। विद्यालय परिसरों में विषैले जीव-जंतुओं से विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भारी वर्षा के दौरान विद्यार्थियों को नालों अथवा जलभराव वाले मार्गों से नहीं जाने दिया जाए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में किसी भी प्रकार की नकली अथवा अनधिकृत पुस्तकों का उपयोग नहीं होना चाहिए। निजी विद्यालयों में केवल राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल द्वारा निर्धारित उचित मूल्य एवं उच्च गुणवत्ता की पाठ्यपुस्तकों का ही उपयोग कराया जाए। किसी भी विद्यालय में निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें अनिवार्य नहीं कराई जाएं तथा निजी विद्यालयों को भी राज्य सरकार की एडवाइजरी का पूर्ण पालन सुनिश्चित कराया जाए।

बैठक में विद्यार्थियों की अपार आईडी (APAAR ID) को अनिवार्य रूप से लागू कराने तथा आरटीई के तहत प्रवेश से संबंधित प्राप्त होने वाली प्रत्येक शिकायत पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने राजकीय विद्यालयों में अधिकाधिक नामांकन सुनिश्चित करने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि अभिभावकों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन, जहां लागू हो वहां परिवहन सुविधा तथा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभों की जानकारी देकर बच्चों का नामांकन बढ़ाया जाए और ड्रॉपआउट रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

बैठक में राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मी शर्मा, संयुक्त सचिव महेंद्र कुमार खिंची, ओएसडी शिक्षा बी.के. गुप्ता, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक-II अशोक कुमार मीणा, अधीक्षण अभियंता गिरिराज गुप्ता सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट सहित सभी जिलों के संबंधित अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

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