
ब्यूरो चीफ रविसिंह किरार/ परिष्कार जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर बुधवार को जयपुर मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए की जयपुर शाखा) द्वारा आयोजित समारोह में कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च सेवा है। चिकित्सक केवल रोग का उपचार नहीं करते, जीवन बचाने का महान दायित्व निभाते हैं। देवनानी ने चिकित्सकों को राष्ट्र निर्माण का मौन शिल्पी बताया।
देवनानी ने महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र राय का स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श है। उन्होंने भगवान धन्वंतरि, महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत की गौरवशाली चिकित्सा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने प्राचीन काल से ही विश्व को चिकित्सा विज्ञान की दिशा दी है।
देवनानी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि डॉक्टर और रोगी के बीच विश्वास की पवित्र डोर और अधिक मजबूत हो। चिकित्सा को केवल व्यवसाय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारतीय संस्कृति चिकित्सा को सेवा और लोककल्याण का माध्यम मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों को उनके श्रम का उचित सम्मान और पारिश्रमिक अवश्य मिलना चाहिए किन्तु चिकित्सा का मूल उद्देश्य मानव सेवा ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति कर्मप्रधान संस्कृति है, धनप्रधान नहीं।
देवनानी ने कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों के अभूतपूर्व योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि जब पूरा विश्व भय और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, डॉक्टरों ने अपने परिवारों से दूर रहकर दिन-रात मरीजों की सेवा की और मानवता की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरोना काल ने सिद्ध कर दिया कि चिकित्सक संकट की घड़ी में समाज के सबसे बड़े संरक्षक होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत@2047 के संकल्प को साकार करने में चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। समारोह में सांसद श्रीमती मंजू शर्मा और एस.एम.एस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने भी संबोधन दिया। जयपुर मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नलिन जोशी ने स्वागत उद्बोधन किया। समारोह में संस्था के सचिव डॉ. अनुराग तोमर सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।