लाल किला मैदान में जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन, कोई भी किसी का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता : अमित शाह

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भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती वर्ष लाल किला मैदान में मनाया
अमित शाह की दो टूक-जन जाति पर यूसीसी लागू नहीं
धानका जनजाति की दमदार प्रस्तुति
ब्यूरो चीफ रवि सिंह किरार/ भव्य परिष्कार दिल्ली।
भगवान बिरसा मुंंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर लाल किला मैदान में रविवार को पहली बार इतने बड़े स्तर पर जनजाति सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से ५५० से अधिक जनजाति आदिवासी समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ शामिल हुए। 550 जनजातियों में धानका जाति ने दमदार प्रस्तुति दी। अपनी पारंपरिक वेषभूषा में धानका जनजाति समाज समिति दिल्ली के नेतृत्व में दिल्ली, जयपुर, अलवर, गाजी का थाना, सीकर, झुंझुनू, नीम का थाना, कोटा, बीकानेर सहित विभिन्न क्षेत्रों से उपस्थित हुए।
कार्यक्रम मुख्य अतिथि अमित शाह गृह मंत्री भारत सरकार, विशिष्ट अतिथि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देवसाय, मा हर्ष चौहान पूर्व संयोजक जनजाति सुरक्षा मंच, डॉ राजकिशोर हांसदा राष्ट्रीय सह संयोजक, सत्येन्द्र चौहान, बुथरी ताती, तेची गुविन, हीरा कमार नागू सहित गणमान्य अतिथि शामिल थे। कार्यक्रम जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। मैनेजमेंट में बीजेपी के करीब 20 विभागों को लगाया गया था।
जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस समागम के मुख्य अतिथि गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराने वालों को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि कोई भी किसी का लोभ लालच और जबरन धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता। शाह ने कहा कि सभी जनहाततयों ने बिना किसी लिखित नियम के विविधता में एकता और एकता में विविधता वाले मंत्र को चरितार्थ करने का काम किया।
गृह मंत्री ने कहा कि यूसीसी समान नागरिक संहिता से किसी को काई भ्रम या संदेह में पडऩे की जरूरत नहीं है। मैं इस मंच से यह स्पष्ट करता हूं कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी वनवासी जगत पर नहीं लगने वाली है, किसी के भी भ्रम में ना आएं। किसी भी सूरत में आपके अधिकारों का कोई भी अक्रिमण नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि वनवासी अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गुजरात और उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने विशेष प्रावधान करके यूसीसी से सारे जनजातियों को बाहर रखने का काम किया।
शाह ने कहा कि देश में पांच दशक परानी नक्सल समस्या को अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब जनजाति क्षेत्रों और पहाड़ों में विकास काम हो रहे है। उन्होंने कहा इसी का परिणाम है कि बंगाल चुनाव में 16 की 16 ट्रइबल रिजर्व सींटे बीजेपी जीतकर आई। कांग्रेस के जमाने से कुल बजट जनजातियों के लिए 28 हजार करोड़ था। अब मोदी सरकार में उसे एक लाख 50 हजार करोड़ तक बढ़ाने का काम किया गया।
पहली बार दिल्ली के लाल किला मैदान में धानका समाज ने 550 से ज्यादा जनजातियों में अपना परचम लहराया :

24 मई 2026 रविवार को आदिवासी सांस्कृतिक समागम में धानका समाज दिल्ली के अजमेरी गेट पर एकत्रित हुए जहां 20 से 30 हजार विभिन्न राज्यों से आए वनवासी पुरुष-महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया व सजेधजे ऊंटो पर बैठे वनवासी अजमेरी गेट से अपनी पारम्परिक वेशभूषा व वाद्ययंत्र के साथ नाचते-गाते लाल किला मैदान पहुंचे। जहां 1.5 से 2.00 लाख वनवासी मौजूद थे।

धानका समाज ने दिल्ली में पहली 550 से ज्यादा जनजातियों के बीच में अपना परचम लहराया। इसी श्रृंखला में दिल्ली व राजस्थान के धानका समाज की ओर से धानका जनजाति समाज समिति दिल्ली के नेतृत्व में दिल्ली, जयपुर, अलवर, गाजी का थाना, सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना, कोटा, बीकानेर से आये सभी धानका समाज के सभी लोग अजमेरी गेट पर एकत्रित हुए जहां से पारम्परिक वेशभूषा व वाद्ययंत्र के साथ नाचते गाते लाल किला मैदान पहुंचे। अजमेरी गेट से लेकर लाल किला मैदान तक धानका ही धानका की गुंज सुनाई दे रही थी।


समिति के लिए गर्व की बात यह थी कि दिल्ली की समिति होने की वजह से रास्ते मे जगह-जगह सरकार द्वारा लगाए गए, स्वागत मंचों पर धानका समाज को पगड़ी दुपट्टों व फुलों से भव्य स्वागत किये गये। पहली बार भारत कि राजधानी दिल्ली के लाल किला मैदान में 2 लाख लोगो के बीच में हमारे धानका समाज के दो व्यक्तियों को मंच पर सम्बोधित किया गया। जिस लाल किले मैदान की प्रचीर का हम लोग आज तक नाम ही सुनते आए थे और टीवी पर ही देखते आये थे, उस पवित्र धरती पर धानका जाति के कदम पडऩा और धानका समाज के नाम का उदघोष होना समाज के लिए गौरव का विषय हैं। समिति के संरक्षक बुला राम धानका व राम सिंह निर्वाण अध्यक्ष ने समागम में आये सभी धानका समाजवासियों का तह दिल से धन्यवाद करते हुए कहा कि मैं अपने भाईयो का जिन्होंने भयंकर गर्मी में भी समागम में पहुंचकर अपने धानका समाज को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराई, इसके लिए मैं और समिति के मोहन लाल किराड़ चैयरमैन, रामसिंह विार्ण, रमेश चंद मोरवाल, रंजीत सिंह सौलंकी, बाबूलाल मावर सहित सभी के प्रत्येक सदस्य समाज वासियों इस समागम में अपनी उपस्थिति प्रकट करने पर शुभकामनाओं के साथ आभार प्रकट करता हूं।

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